चूना पत्थर के लिए होने वाली ड्रिलिंग फिलहाल स्थगित:कुक्षी में सड़कों पर उतरे ग्रामीण; नेता प्रतिपक्ष बोले- इससे लोगों में जमीन छीनने का डर

धार जिले की कुक्षी तहसील के कई गांवों में चूना पत्थर की खोज और सीमेंट फैक्ट्री प्रस्ताव के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन तेज हो गया है। राजस्थान की श्री सीमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा खनिज खोज के लिए ड्रिलिंग शुरू किए जाने के विरोध में सोमवार को कुक्षी में धरना प्रदर्शन और चक्का जाम किया गया। इस प्रदर्शन में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार, विधायक सुरेंद्र सिंह बघेल समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। विरोध के बाद सीमेंट कंपनी ने बुधवार से ग्रामीण क्षेत्रों में की जाने वाली ड्रिलिंग स्थगित कर दी है। जिला प्रशासन की ओर से आए अधिकारी ने इसकी घोषणा की। विस्थापन और जमीन छीनने का डर क्षेत्र के बामनबयडी, टकारी, घोड़ा, तलावडी, चितावरा, खारी, मोगरा, डाबड़ी और भीमपुरा सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री लगने से उन्हें विस्थापन और खेती की जमीन छिनने का खतरा है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि इससे जल, जंगल और जमीन पर भी बुरा असर पड़ेगा। देखें विरोध की 4 तस्वीरें… नेता प्रतिपक्ष सिंगार भी मौके पर पहुंचे नेता प्रतिपक्ष सिंगार ने कहा कि सरकार ने पेसा एक्ट को लागू तो कर दिया है, लेकिन ग्राम सभाओं को उनके वास्तविक अधिकार नहीं दिए गए हैं। ग्राम सभा के ठहराव प्रस्ताव और सहमति के बिना किसी भी कंपनी को आदिवासियों की जमीन लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार बड़े उद्योगपतियों के हित में काम कर रही है। कारपोरेट जगत को लाभ पहुंचाने के लिए आदिवासियों और निचले वर्ग के लोगों की जमीन और आजीविका छीनी जा रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणजन अपने अधिकारों के लिए अंतिम दम तक लड़ाई लड़ेंगे। धरने में अरावली पर्वत श्रंखला और सिंगरौली में लाखों पेड़ों की कटाई का मुद्दा भी शामिल किया गया है। नेताओं ने कहा कि विकास का झूठा सपना दिखा कर आदिवासियों की जमीन छीने जाने की कोशिश की जा रही है। विधायक बघेल ने सरकार को घेरा वहीं कुक्षी विधायक सुरेंद्र सिंह बघेल ने आदिवासियों के साथ अन्याय का आरोप लगाते हुए भाजपा सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पेसा एक्ट के तहत ग्राम सभाओं को जो अधिकार मिलने चाहिए, वे आज तक जमीन पर नहीं उतर पाए हैं। सरकार केवल कागजों पर ग्रामों को अधिकार संपन्न बनाने का दावा कर रही है। विधायक ने केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा- एक ओर “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सिंगरौली क्षेत्र में लाखों पेड़ों की कटाई कर उद्योगपतियों को जमीन दी जा रही है। उनका कहना था कि जमीन के भीतर मौजूद खनिज पर पहला अधिकार आदिवासियों का है और खदानों का लाभ उन्हें मिलना चाहिए। वे विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन आदिवासियों को बेदखल कर या उनकी जिंदगी की कीमत पर किया जाने वाला विकास स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना था कि आदिवासी समाज की सहमति और अधिकारों के बिना किसी भी परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। जमीन नहीं देने का ऐलान जयस संगठन के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रविराज बघेल ने बताया कि सभी प्रभावित गांवों के ग्रामीण इस फैसले के खिलाफ एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण किसी भी कीमत पर चूना फैक्ट्री के लिए अपनी जमीन नहीं देंगे और जल, जंगल व जमीन की लड़ाई अंतिम दम तक लड़ेंगे। चरणबद्ध आंदोलन की तैयारी प्रभावित गांवों के सरपंचों, पटेलों, तड़वी समाज के प्रतिनिधियों और अन्य ग्रामीणों ने दो दिन पहले बैठक कर 23 दिसंबर से कुक्षी में धरना प्रदर्शन शुरू करने का निर्णय लिया था। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा व्यवस्था श्री सीमेंट कंपनी द्वारा ड्रिलिंग कार्य शुरू किए जाने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया है, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। 815 हेक्टेयर क्षेत्र आवंटित खनिज विभाग के अनुसार, राजस्थान की श्री सीमेंट कंपनी को नीलामी के माध्यम से 815 हेक्टेयर क्षेत्र का लाइम स्टोन ब्लॉक आवंटित किया गया है। कंपनी को इन गांवों में चूना पत्थर की खोज के लिए तीन वर्षों की अवधि के लिए ड्रिलिंग की अनुमति दी गई है। सीएम और केंद्रीय मंत्री नड्डा धार में वहीं मंगलवार को प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री एवं जेपी नड्डा जिले के दौरे पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने लगभग 260 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले मेडिकल कॉलेज का भूमि पूजन किया। इसके अलावा विभिन्न विकास योजनाओं के तहत कई अन्य परियोजनाओं की भी शुरुआत और लोकार्पण किया गया। एसडीएम बाेले- शासकीय भूमि पर ही होगा खोज कार्य क्षेत्र में सीमेंट कंपनी द्वारा चूना पत्थर की खोज का कार्य शासकीय भूमि पर ही शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कंपनी बुधवार से सरकारी जमीनों पर ड्रिलिंग का काम प्रारंभ करेगी। ड्रिलिंग के दौरान यदि उपयोगी चूना पत्थर मिलने की पुष्टि होती है, तभी कंपनी आगे की प्रक्रिया अपनाएगी। एसडीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि निजी जमीन पर बिना सहमति के कोई ड्रिलिंग नहीं की जाएगी। किसी भी निजी भूमि पर खनिज खोज का कार्य तभी होगा, जब संबंधित जमीन मालिक ग्रामीणों की लिखित सहमति प्राप्त होगी।

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