चोरी का डर, वनोपज देने वाले पेड़ों की रखवाली कर रहे बैगा-आदिवासी

भास्कर न्यूज | कवर्धा कबीरधाम जिले में वनोपज चिरौंजी गुठली यहां के बैगा-आदिवासियों के आमदनी का बड़ा स्रोत है। एक पेड़ से 1 क्विंटल तक चिरौंजी गुठली मिलता है। सरकारी खरीद से प्रति क्विंटल औसतन 27 हजार रुपए तक आमदनी मिल जाती है। अच्छी आमदनी के चलते पेड़ों से इस वनोपज की चोरी भी होती है। वनांचल के जिन बैगा-आदिवासियों के खेतों में वनोपज (चिरौंजी गुठली) के पेड़ लगे हैं, वे इन दिनों इन पेड़ों की रखवाली में लगे हैं। चोरी के डर से दिनभर तपती धूप में पेड़ों से कच्चे चिरौंजी गुठली को तोड़कर सहेज रहे हैं। इसके बाद इन्हें घर ले जा रहे हैं। फलों से गूदा निकालने के बाद सहकारी समितियों में इसे बेचेंगे। खास बात ये है कि खेतों में लगे वनोपज पेड़ों की रखवाली पुरुष करते हैं। जबकि इसे सहेजने, सुरक्षित करने का काम महिलाएं ही करती हैं। समितियों में 15 अप्रैल के बाद इसकी खरीदी शुरू होगी: चोरी के डर से ग्रामीण कच्चे चिरौंजी गुठली तोड़कर संग्रहण कर रहे हैं। सरकारी समितियों में 15 अप्रैल के बाद इसकी खरीदी शुरू होगी। अभी ग्रामीण चिरौंजी गुठली तोड़ाई कर घर ला रहे हैं। साप्ताहिक बाजार में जाकर इसे व्यापारियों को बेच रहे हैं। बदले में सब्जी व जरूरत के सामान खरीद रहे हैं। दूरस्थ वनांचल गांवों में आय का मुख्य स्रोत है जिले के पंडरिया ब्लाक में वनांचल इलाकों में चिरौंजी गुठली के पेड़ ज्यादा हैं। इसमें देवान पटपर, भाकुर, छिंदीडीह, बोहिल, भैंसाडबरा, रूख्मीदादर, कांदावानी, झूमर, बिरहुलडीह समेत कई गांव हैं। इसके अलावा तरेगांव जंगल क्षेत्र के गांव भी प्रमुख हैं। यहां के बैगा-आदिवासी परिवारों की आय का यह बड़ा स्रोत है। इस वर्ष बड़ी मात्रा में चिरौंजी उत्पादन का अनुमान है। इसे लेकर ग्रामवासियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

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