छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में मंगलवार देर रात इंद्रावती नदी में अचानक आई बाढ़ ने बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों में भारी तबाही मचाई। सुरोखी, फुंडरी और बांगापाल गांवों में 50 से अधिक घर तेज बहाव में बह गए। करीब 50 परिवार बेघर हो गए हैं। लोग अपना राशन, कपड़े और जरूरी सामान भी नहीं बचा सके। बाढ़ का पानी इतनी तेजी से आया कि लोग अपना सामान भी नहीं बचा पाए। उनका राशन, अनाज और कीमती सामान पानी में बह गया। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सुरोखी गांव के प्राथमिक स्कूल में राहत शिविर बनाया है। प्रभावित परिवारों को राहत शिविर में पहुंचाया गया है। वहां उन्हें भोजन, पीने का पानी और जरूरी दवाएं दी जा रही हैं। इंद्रावती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे निचले इलाकों में और जलभराव की आशंका है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में भारी बारिश की भविष्यवाणी की है। स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ की टीमों को तैनात किया जा रहा है। नक्सल क्षेत्र में तरेम-पामेड़ मार्ग बाढ़ में बहा, अस्थाई पुल भी क्षतिग्रस्त वहीं, बीजापुर के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में भारी बारिश ने तरेम से पामेड़ तक का मार्ग बाधित कर दिया है। तुमेर वागु जीडपल्ली में उफान पर है। इससे दर्जनों गांवों के हजारों लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है। जीडपल्ली कैंप से 500 मीटर दूर बना 10 मीटर चौड़ा अस्थायी पुल बाढ़ में बह गया है। इससे पामेड़ से धर्मारम होते हुए जीडपल्ली तक का 48 किलोमीटर का मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। निर्माणाधीन सड़क पर जगह-जगह कीचड़ और गड्ढे बन गए हैं। वाहनों को कीचड़ से निकालने के लिए पोकलेन और जेसीबी मशीनों का सहारा लेना पड़ रहा है। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन को इस माओवादग्रस्त क्षेत्र में सड़क निर्माण का कार्य सौंपा गया है। सुरक्षा की दृष्टि से इस मार्ग पर तरेम से पामेड़ तक कुल 8 सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं। ये कैंप चिन्नागेल्लूर, छुड़वाई, कोंडापल्ली, कवरगट्टा, जीडपल्ली-1, जीडपल्ली-2, धर्मारम और पामेड़ में स्थित हैं। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।


