छत्तीसगढ़ आज पहली बार बिहार दिवस का आयोजन किया जा रहा है। सत्ता और बीजेपी संगठन से जुड़े लोग इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, बिहार सरकार के मंत्री और छत्तीसगढ़ भाजपा प्रभारी नितिन नबीन भिलाई और रायपुर के कार्यक्रमों में जाएंगे। इस अवसर पर प्रवासी बिहारी समाज के सफल व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा। भाजपा की ओर से ऐसे आयोजन पूरे देश में किए जा रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसे लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। कांग्रेस का विरोध, भाजपा पर लगाया चापलूसी का आरोप इस आयोजन को लेकर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा केवल अपने बिहार प्रभारी नितिन नबीन की चापलूसी के लिए यह आयोजन कर रही है। उन्होंने सवाल किया: पूर्व मंत्री उमेश पटेल का बयान पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने भी इस आयोजन पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक कदम करार दिया। उन्होंने कहा: भाजपा का तर्क इस मामले में बीजेपी का कहना है कि एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। बीजेपी प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन का कहना है कि छत्तीसगढ़ में प्रवासी बिहारी समुदाय का काफी योगदान रहा है और उनके सम्मान में इस आयोजन की शुरुआत की गई है। पार्टी का दावा है कि यह केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम है, जिसका कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है। क्यों मनाया जाता है बिहार दिवस बिहार राज्य की स्थापना 22 मार्च 1912 को बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग होकर हुई थी। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में हर साल 22 मार्च को बिहार दिवस मनाया जाता है। भाजपा के अनुसार, छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में प्रवासी बिहारी समाज के लोग रहते हैं और उनके योगदान को सम्मान देने के लिए यह आयोजन किया जा रहा है। राजनीतिक बवाल के बीच आयोजन जारी बिहार दिवस को लेकर राजनीतिक बवाल के बावजूद, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कार्यक्रम पूरी तरह सांस्कृतिक और सामाजिक सम्मान से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह होगा कि इस आयोजन के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह मुद्दा कितना बड़ा रूप लेता है और विपक्ष इस पर आगे क्या रणनीति अपनाता है।


