छत्तीसगढ़ में मंदिरों में उमड़ रही भक्तों की भीड़:मां बम्लेश्वरी,महामाया, राम मंदिर में सुबह से श्रद्धालुओं का तांता; पढ़िए दर्शन की व्यवस्था और गाइडलाइन

नए साल 2026 की शुरुआत होने वाली है। इसे लेकर जश्न का माहौल देखने को मिल रहा है। वहीं बड़ी संख्या में लोग नए साल की मंगलकामना के लिए मंदिरों में भी पहुंच रहे हैं। छत्तीसगढ़ के रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर और दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। इसके अलावा डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर, रायपुर के राम मंदिर में नए साल पर 4 लाख से ज्यादा भक्तों के पहुंचने का अनुमान है। बागबाहरा के चंडी मंदिर, अंबिकापुर के महामाया मंदिर भी श्रद्धालुओं से गुलजार हैं। नए साल के पहले दिन दर्शन के लिए सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। खास बात यह है कि घुंचापाली चंडी माता मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां दर्शन के लिए आने वाले भालुओं को लेकर भी यह मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है। पहले दिन श्रद्धालु दर्शन के साथ-साथ प्रकृति और आस्था के इस अनूठे संगम के साक्षी बनेंगे। नए साल पर इन मंदिरों तक कैसे पहुंचे, यहां दर्शन की व्यवस्था और गाइडलाइन को लेकर पढ़िए रिपोर्ट… पहले देखिए ये तस्वीरें- दंतेवाड़ा का मां दंतेश्वरी मंदिर- नए साल पर बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के मंदिर में हर दिन करीब 5-6 हजार भक्त दर्शन कर रहे हैं। इसमें बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के लोग शामिल हैं। इस बार 1 जनवरी से भक्तों को VIP दर्शन की सुविधा मिलेगी। इसके लिए 2100 रुपए की पर्ची कटवानी पड़ेगी। पहले यह सुविधा सिर्फ नवरात्र में ही दी जा रही थी। मान्यता है कि यहां माता सती का दांत गिरा प्रधान पुजारी हरेंद्र नाथ जिया ने बताया कि, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब विष्णु भगवान ने अपने चक्र से सती के शरीर को 52 भागों में विभक्त किया था। तब उनके शरीर के 51 अंग देशभर के विभिन्न हिस्सों में गिरे थे और 52वां अंग उनका दांत यहां गिरा था। इसलिए देवी का नाम दंतेश्वरी और जिस ग्राम में दांत गिरा उसका नाम दंतेवाड़ा पड़ा। होटल में 1500 और धर्मशाला में 200 रुपए में मिल सकता है कमरा बाहर से दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को यहां 1 हजार रुपए से लेकर 1500 रुपए तक में कमरे मिल जाते हैं। सुकमा, कोंटा और तेलंगाना से आने वाले भक्त दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय और बीजापुर, जगदलपुर और रायपुर की तरफ से आने वाले भक्त गीदम और दंतेवाड़ा दोनों जगहों में होटल और धर्मशाला में 200 रुपए में रुक सकते हैं। कैसे जाएं : जगदलपुर तहसील से 80 किमी दूर और रायपुर शहर से 350 किमी दूर स्थित है। यह NH-30 से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। रायपुर शहर से सड़क मार्ग से करीब 7-8 घंटे की यात्रा दूरी पर है। सीधे जाने के लिए बस की सुविधा है। रायपुर का राम मंदिर- रायपुर स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए नए साल में सुबह से लेकर आधी रात तक दर्शन की व्यवस्था की गई है। एक जनवरी को दिनभर 4 से 5 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इस दिन लोग बड़ी तादाद में पहुंचते हैं। इसलिए मंदिर सुबह 5.30 बजे से रात 12 बजे तक खुला रहेगा। कैसे जाएं : रायपुर तक हवाई, रेल और बस सुविधा है। यहां से प्राइवेट ऑटो या टैक्सी से मंदिर जाया जा सकता है। बिलासपुर का महामाया मंदिर- बिलासपुर के रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर में एक जनवरी को एक लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचने की संभावना है। एक दिन पहले भी लाखों की संख्या में यहां भक्त पहुंचे थे। सुबह 3 बजे से लेकर रात 9 बजे तक मंदिर खुला रहता है। पहाड़ और जंगल से घिरे इस स्थान पर घोंघा जलाशय, चांपी जलाशय भी है, जहां लोग मनोरंजन के लिए पहुंचते हैं। घूमने के लिए आसपास प्रमुख पर्यटन केंद्र रतनपुर में कका पहाड़, लखनी देवी, रामटेकरी, नक्षत्र वाटिका, खूंटाघाट डैम, दुलहरा सरोवर, बादल महल, कोठी पहाड़ सहित ऐतिहासिक किला है, जो प्रमुख पर्यटन केंद्र हैं। एडिशनल एसपी ग्रामीण अर्चना झा ने बताया कि मंदिर और पिकनिक स्पॉट की सुरक्षा के लिए पुलिस अलर्ट है। अतिरिक्त बल मुहैया कराया जाएगा। कैसे जाएं: रतनपुर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन करीब 25 किमी दूर बिलासपुर में है। उसके बाद आपको वहां से बस या टैक्सी-ऑटो से आना होगा। बिलासपुर सड़क और रेल मार्ग से देश के लगभग सभी बड़े स्टेशनों से जुड़ा हुआ है। अंबिकापुर का महामाया मंदिर- अंबिकापुर स्थित मां महामाया मंदिर छत्तीसगढ़ के शक्ति-पीठों में से एक है। सरगुजा राजपरिवार की कुलदेवी भी हैं। मां महामाया को छिन्नमस्तिका भी कहा जाता है। मान्यता के अनुसार महादेवी का धड़ अंबिकापुर और सिर रतनपुर महामाया मंदिर में रखा गया है। नए साल पर मंदिर में VIP दर्शन को लेकर कोई व्यवस्था नहीं की गई है। मंदिर के आसपास दर्शनीय स्थल महामाया मंदिर की पहाड़ी के ऊपर करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर ऑक्सीजन पार्क है। यह स्थल वन विभाग की ओर से मेंटेन किया जाता है। यहां झूले और वॉच टावर भी हैं। वॉच टावर से शहर का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है। कैसे जाएं: दुर्ग-अंबिकापुर ट्रेन की सुविधा है। अंबिकापुर तक सीधे बस की सुविधा। रेलवे स्टेशन से टैक्सी, बस और ऑटो की सुविधा है। डोंगरगढ़ का मां बम्लेश्वरी मंदिर- राजनांदगांव जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर डोंगरगढ़ की पहाड़ी पर मां बम्लेश्वरी देवी का मंदिर है। 31 दिसंबर और 1 जनवरी को मंदिर में 4 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। मंदिर में हजारों की संख्या में लोग रोजाना ही दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में VIP दर्शन के लिए कोई शुल्क नहीं है। मंदिर में भंडारा, रेस्टोरेंट और होटल भी मंदिर के आस-पास सैकड़ों रेस्टोरेंट है। वहीं मंदिर ट्रस्ट ऊपर सुबह 11 बजे से 10 रुपए में भंडारे का आयोजन करता है। भोजन पूरी तरह से सात्विक रहता है। जिसमें दाल, चावल, सब्जी और आचार मिलता है। जिसे माता को अर्पित करने के बाद प्रसादी के रूप में भक्तों को परोसा जाता है। कैसे जाएं: रायपुर से 100, नागपुर से 190 किमी की दूरी पर स्थित है और मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग के अंतर्गत आता है। सीधे ट्रेन और बस की सुविधा है। महासमुंद का चंडी मंदिर महासमुंद के बागबहारा स्थित मां चंडी मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां नवरात्रि पर हजारों की संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन नए साल में पर्यटन पर जोर ज्यादा रहता है। इसका बड़ा कारण मंदिर में भालुओं के दर्शन के लिए आना है। उन्हें देखने के लिए सुबह और शाम लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है। 300 से लेकर 1000 रुपए में कमरा मंदिर परिसर से लगी धर्मशाला है, जिसमें AC, NON AC डबल बेड के 15 कमरे है। रेंट 300 से लेकर 1000 रुपए है। जो भी श्रद्धालु धर्मशाला के हॉल में ठहरना चाहते हैं, उनके लिए भी 50 रुपए शुल्क पर गद्दा तकिया दिया जाता है। भोजन के लिए स्वयं की व्यवस्था रखनी पड़ती है। कैसे जाएं : बागबहारा तक बस की सुविधा, यहां से टैक्सी या ऑटो से जाया जा सकता है। स्वयं के वाहन या टैक्सी से जाना ज्यादा बेहतर है। ……………………………………… इससे संबंधित यह खबर भी पढ़िए… न्यू ईयर में बदला ट्रेंड, ऑफबीट जगहें बनीं हॉट डेस्टिनेशन:इस बार वही पुरानी जगहें नहीं, छत्तीसगढ़ की ये ट्रेंडिंग डेस्टिनेशन करें ट्राय नया साल आने वाला है और जश्न की प्लानिंग भी तेज हो चुकी है। छत्तीसगढ़ में हर साल न्यू ईयर पर वही जानी-पहचानी जगहों पर सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। होटल फुल, सड़कें जाम और सेलिब्रेशन के नाम पर सिर्फ शोर-शराबा। लेकिन इस बार ट्रेंड कुछ अलग है। पढ़ें पूरी खबर…

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