छत्तीसगढ़ में शिकार और जानवरों के अंग बेचने के पीछे एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। इसके पीछे तंत्र-मंत्र का भी कनेक्शन हो सकता है। वन विभाग के मुताबिक हिरण के सींग समेत कुछ जानवरों के अंगों को तांत्रिक क्रिया में इस्तेमाल करने लिए इनका शिकार किया जाता है। 29 अप्रैल को वन विभाग ने 2 शिकारियों को रायपुर से गिरफ्तार किया है। वन विभाग के अफसर का कहना है कि, इस सिंडिकेट में 30-32 लोग हो सकते हैं। वैसे तो ये दावत करते थे और अंगों को बेचते थे। ऐसे में तंत्र-मंत्र के एंगल से भी जांच हो रही है। वन विभाग ने जानवरों के अंगों के साथ कैसे इन तस्करों को पकड़ा और क्या है इसका तंत्र-मंत्र कनेक्शन इस रिपोर्ट में पढ़िए:- देखिए जानवरों के अंग की तस्वीरें जो कार्रवाई में जब्त की गई… पूरा मामला जानिए 29 अप्रैल को रायपुर में फराज और नियाज सफेद एक्टिवा पर बोरी रखकर जा रहे थे। आदर्श नगर इलाके में सड़क किनारे खड़े दो राहगीरों ने रोका। फराज और रियाज कुछ समझ पाते, इससे पहले ही उन राहगीरों ने खुद को वन अफसर और कर्मी बताया और सड़क किनारे खड़ी ब्राउन कलर की बोलेरो में बैठने के लिए कहा। फराज और रियाज अफसरों से विवाद करने लगे, और एक्टिवा में रखी बोरी को अपने से दूर फेंक दिया। अफसरों ने दोनों को हिरासत में लेकर बोरी की जांच की तो उससे हिरण–चीतल के दो सींग निकले। वनकर्मी आरोपी को गिरफ्तार करके रेंज ऑफिस पहुंचे और उनसे पूछताछ की। दोनों आरोपी हैं जमीन कारोबारी पूछताछ में फराज और रियाज ने अपना परिचय जमीन कारोबारी के रूप में दिया। साथ ही हिरण–चीतल के अवशेष सिरपुर से लाने की बात कही। अफसरों का कहना है कि, आरोपियों ने गिरोह की मदद से बाजार में बेचने की बात भी कबूली है। आशंका है, कि आरोपियों ने खुद ही चीतल–हिरण का शिकार किया होगा और उसके सींग को खोपड़ी सहित निकाला होगा। बाकी लोगों के खिलाफ सबूत जुटाकर तलाशी भी की जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारी होगी। आरोपियों को पकड़ने से पहले की प्लानिंग जानिए तस्करों पर कार्रवाई करने वाली टीम को लीड करने वाले रेंजर ने बताया, कि आरोपियों के खिलाफ जानकारी होली के आस पास ही मिल गई थी। आरोपियों पर नजर रखी जा रही थी। पीसीसीएफ कार्यालय के अधिकारियों को भी तस्करों के खिलाफ इनपुट मिला था। वरिष्ठ अधिकारियों ने आरोपियों की एक्टिविटी पर नजर रखने और माल सहित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। तस्कर फराज खान और रियाज खान के खिलाफ तकनीकी जांच की गई। तकनीकी जांच के आधार पर जानकारी मिली, कि दोनों तस्कर 27-28 अप्रैल को बारनवापारा के जंगल में थे। 29 अप्रैल की सुबह उनका लोकेशन रायपुर के आदर्श नगर इलाके में दिखा। इनपुट के आधार पर वन अफसरों की टीम उनकी निगरानी में लग गई, इस बीच सुबह 9.30 बजे सिविल वर्दी में तैनात वनकर्मी अमृतपाल ने उनकी गाड़ी को रोक लिया। आरोपी पहले तो वनकर्मी से बहस करने लगे। इसके बाद सिविल ड्रेस में मौजूद वनकर्मी दुष्यंत गोस्वामी, दीपक वर्मा, सेंटयागो, शेख अमान और निरंजन साहू की टीम मौके पर पहुंची और आरोपियों को हिरासत में लिया। दो साल से सक्रिय है आरोपियों का गिरोह वन अफसरों ने बताया, कि आरोपी और उनके गिरोह के सदस्य बीते दो साल से शिकार और तस्करी के कारोबार में सक्रिय है। आरोपियों के गिरोह में कारोबारियों के अलावा, तंत्र-मंत्र करने वाले लोग, कसाई और हथियार कारोबार से जुड़े कुछ रसूखदार भी शामिल हैं। मोबाइल से आरोपियों के गिरोह के और सदस्यों की जानकारी निकाली जा रही है। जब्त अवशेषों को सील करके कागजी कार्रवाई में जुटे अफसर वन अफसरों के अनुसार आरोपियों से जब्त हिरण के सींग को वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में सील करके रखा गया है। आरोपी तस्करों के खिलाफ कागजी कार्रवाई पूरी की जा रही है। वन्य प्राणियों के अंगों का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवा बनाने के अलावा जादू टोना में किया जाता है। ऐसे में बड़े पैमाने में तस्करों को ये अवशेष बेचने के लिए लोग मिल जाते हैं। तस्करों और शिकारियों के साथ वन्य प्राणियों के अवशेष खरीदने और रखने वालों पर कार्रवाई करने की बात वन अफसरों ने कही है। जांच जारी है, आने वाले दिनों में बड़ा खुलासा करेंगे: रेंजर दीपक तिवारी तस्कर फराज और रियाज के गिरोह की जानकारी होली में मिली थी। इनके मूवमेंट पर तब से नजर रखी जा रही थी। आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ने के लिए मैन्यूअल जांच के साथ तकनीकी जांच भी की जा रही थी। 29 अप्रैल को मुखबिर और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों को रंगे हाथ हिरण के सींग के साथ पकड़ा। पूछताछ में आरोपियों ने कई जानकारी दी थी। आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में बड़ी कार्रवाई हमारे टीम द्वारा किया जाएगा। वशीकरण सिद्धि प्राप्त करने हिरण सींग का इस्तेमाल तंत्र क्रिया में हिरण के सींग किस काम आता है, इसकी जानकारी के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने रायपुर निवासी तांत्रिक से चर्चा की। नाम ना छापने की शर्त पर तांत्रिक ने बताया, कि हिरण की खाल में तांत्रिक साधना करते हैं। किसी को वश में करने के लिए सिंग समेत ये अंग काम आते हैं। साधना अगर सही सिद्ध ना हो तो उल्टा भी हो सकता है। तांत्रिक ने आगे यह भी कहा कि, बहरूपिया लोग अपने फायदे के लिए लोगों को गुमराह करते हैं, इनसे सचेत रहना चाहिए। दैनिक भास्कर का उद्देश्य किसी तरह का अंध विश्वास फैलाना नहीं है। ये चर्चा सिर्फ खबर के पीछे की पूरी जानकारी पता करने के लिए ली गई है।


