सड़क हादसों में पिछले 24 साल में प्रदेश के 33 जिला मुख्यालयों में से 20 छोटे शहरों की जनसंख्या से अधिक लोगों की मौत हो गई। 2001 से 2024 के बीच विभिन्न जिले में कुल 100150 लोगों की मौत हुई। यह संख्या जांजगीर-चांपा सहित 20 ऐसे जिला मुख्यालयों की शहरी आबादी से अधिक है। इस अवधि में छत्तीसगढ़ में 301456 सड़क हादसे हुए और इनमें 285450 लोग घायल हो गए। ये संख्या कुछ बड़े जिला मुख्यालयों के शहरों की जनसंख्या से अधिक है। दैनिक भास्कर ने 24 साल में हादसों में हुई मौत के आंकड़ों को आधार मानकर प्रदेश के सभी 33 जिला मुख्यालयों की आबादी देखी, तो पता चला कि 20 जिला मुख्यालयों की आबादी से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। कई जिलों की कुल शहरी आबादी यानी नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्र की आबादी से ज्यादा लोगों की हादसों में जान जा चुकी है। हर साल हादसों के साथ-साथ मौत व घायलों की संख्या बढ़ रही है। यह चिंता का विषय है। भास्कर एक्सपर्ट- जयंत थोरात, रिटायर्ड डीआईजी हत्या की तरह ही हादसों के लिए मांगा जाए अधिकारियों से स्पष्टीकरण तब लगेगी लगाम हत्याओं को महत्व दिया जाता है पर सड़क दुर्घटनाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। एक भी हत्या हो जाती है तो अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाता है, पर सड़क दुर्घटनाओं के मामले में ऐसी कार्रवाई नहीं की जाती है। यदि रोड एक्सीडेंट में मौत के मामलों स्पष्टीकरण मांगा जाए तो इससे काफी लगाम लगेगी। सड़क दुर्घटनाएं सभी एजेंसियों की प्राथमिकता नहीं है। शीर्ष अधिकारी शायद ही कभी जूनियर से स्पष्टीकरण मांगते हैं, भले ही एक दर्जन लोगों की मौत हो जाए। दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या एक गंभीर समस्या बन चुकी है। नागरिकों की जिम्मेदारी बनती है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दे।


