छात्राओं ने पूछा-सर, आप कैसे बने कलेक्टर?:एलएन मंत्री बोले- पहले लेक्चरर था, कॉलेज में जिलाधीश का वेलकम देख ठाना

पाली के कलेक्टर एलएन मंत्री से छात्राओं ने पूछा- सर आप कलेक्टर कैसे बने? सवाल सुनकर कलेक्टर ने जवाब दिया- पहले मैं लेक्चरर था। हमारे कॉलेज में गेस्ट बनकर आए कलेक्टर का स्वागत देखकर ठान लिया कि अब कलेक्टर ही बनना है। पाली शहर के जिला परिषद सभागार में बुधवार को कॉफी विद् कलेक्टर कार्यक्रम हुआ। आयोजन जिला प्रशासन और महिला अधिकारिता विभाग की ओर से किया गया। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के तहत हुए कार्यक्रम में कक्षा 9 से 12 तक की निजी और सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट पहुंचे थे। जिला कलेक्टर एलएन मंत्री ने छात्राओं को कॅरियर को लेकर गाइड किया। कलेक्टर ने अपने सफर के बारे में बताया कार्यक्रम में बालिया स्कूल की स्टूडेंट ने पूछा- आप कलेक्टर कैसे बने? इस पर जिला कलेक्टर एलएन मंत्री ने बताया- मैं पुष्कर का रहने वाला हूं। पढ़ाई में शुरू से ही रुचि रही। कॉलेज में गोल्ड मेडलिस्ट रहा। फिर लेक्चरर बन गया। वर्ष 1990 में कॉलेज की रजत जयंती के अवसर पर अतिथि के रूप में तत्कालीन जिला कलेक्टर पहुंचे तो लोग उनके वेलकम को लेकर तत्पर नजर आए। जिससे मैं काफी प्रभावित हुआ और साथी लेक्चरर से इसको लेकर चर्चा की। मैंने पूछा कि कलेक्टर बनने के लिए क्या करना होगा। फिर क्या था सेलेब्स लेकर घर पर ही पढ़ना शुरू किया और फिर मेरा RAS में चयन हो गया। पदोन्नत कि बाद IAS बना और आज जिला कलेक्टर हूं। स्टूडेंट मनीषा कुमावत बोली- सर, आप जिला कलेक्टर ही क्यों बने? एक छात्रा मनीषा कुमावत ने सवाल किया- सर आप कलेक्टर ही क्यों बने? जिला कलेक्टर एलएन मंत्री ने कहा- जिला कलेक्टर का पद ऐसा है जिस पूरे जिले की जिम्मेदारी होती है। अलग-अलग तरह के काम करने का खूब मौका मिलता है। इसलिए मुझे ऐसी ही नौकरी करने की इच्छा थी जिससे लोगों से मिलूं उनकी मदद करूं। उनकी समस्याओं का समाधान करूं। इसलिए जिला कलेक्टर बना। स्टूडेंट गुरबिंदर कौर ने पूछा- नर्वस कब हुए ? एक छात्रा गुरबिंदर कौर ने सवाल किया- सर, क्या कभी ऐसा मौका आया जब आप नर्वस हो गए हों? इस पर जिला कलेक्टर ने कहा- मुझे चैलेंज पसंद है। हार मानना पसंद नहीं। भले ही परिस्थितियां कैसी भी हों लेकिन हमें खुद पर विश्वास रखना चाहिए। काम अपने आप बन जाते हैं। हम खुद ही जब सोच लेते हैं कि यह मेरे से नहीं होगा तो मान लीजिए आप वह काम पूरा नहीं कर पाएंगे। नौकरी हो, पढ़ाई हो या पारिवारिक लाइफ। हर जगह इस तरह के चैलेंज हमारे सामने आते हैं। उन परिस्थतियों में खुद पर विश्वास कर निर्णय लेना होता है न की भावनाओं में बहकर। कलेक्टर ने छात्राओं से भी कई तरह के प्रश्न पूछे। राय और मशविरा में क्या अंतर है?, तुम्हारी नजर में बड़ा आदमी कौन है?, हम सैनिकों का सम्मान क्यों करते है? सवालों का गर्ल्स ने आंसर दिया। प्रशिक्षु IAS बिरजू गोपाल ने भी स्टूडेंट को किया गाइड वर्कशॉप में मौजूद छात्राओं को संबोधित करते हुए प्रशिक्षु IAS बिरजू गोपाल ने फिल्मों और महापुरुषों का उदाहरण देकर छात्राओं में आत्मविश्वास भरने का काम किया। उन्होंने कहा कि जीवन में जब परिस्थितियां अपने अनुकूल नजर नहीं आए तो उस समय चिंता नहीं चिंतन करना चाहिए। भावनाओं में बहकर कभी भी कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए। आप जो बनना चाहते हैं जिसमें आपकी रुचि है वह अपने परिजनों को बताएं और उसमें अपना कॅरियर बनाने का लक्ष्य निर्धारित करे क्योंकि आप उसमें अपना बेस्ट दे सकेंगे। वर्कशॉप में यह लोग रहे मौजूद वर्कशॉप में जिला परिषद के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेन्द्र मेहता, महिला अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक भागीरथ चौधरी, बांगड़ हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सुमन चौधरी, बालिया स्कूल प्रिंसिपल सुनीता, जेंडर स्पेशलिस्ट राजश्री, केन्द्र प्रबंधक प्रियंका व्यास, सखी सेंटर प्रबंधक देवी बामणिया सहित कई कई स्टूडेंट और टीचर मौजूद रहे।

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