छतरपुर जिले में एक छात्रा से कथित मारपीट का मामला गरमा गया है। प्रशासनिक अधिकारी पर एक छात्रा को थप्पड़ मारने और अभद्रता करने के आरोप हैं। अब तक एफआईआर दर्ज न होने से आम जनता और छात्र संगठनों में रोष बढ़ रहा है, और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सोमवार दोपहर करीब 3 बजे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और अन्य छात्र संगठनों के कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने कलेक्टर पार्थ जैसवाल को ज्ञापन सौंपा, जिसमें संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। ज्ञापन में बताया गया कि 3 दिसंबर को एमए की छात्रा गुड़िया पटेल सटई रोड स्थित कृषि उपज मंडी में खाद लेने गई थी। वहां नायब तहसीलदार रितु सिंह किसानों को टोकन बांट रही थीं। छात्रा द्वारा टोकन और खाद वितरण की जानकारी पूछने पर अधिकारी कथित तौर पर भड़क गईं और छात्रा को थप्पड़ मार दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसके बाद कलेक्टर ने नायब तहसीलदार को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा था। छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि घटना के बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम अखिल राठौर और तहसीलदार आकाश नीरज ने भी छात्रा सहित लाइन में खड़ी महिलाओं के साथ अभद्रता की। उन पर गाली-गलौज करने, धमकाने और जेल भेजने की बात कहने का आरोप है। संगठन का यह भी दावा है कि प्रशासन ने बाद में अपने बचाव में छात्रा पर दबाव डालकर एक वीडियो बयान जारी करवाया। एनएसयूआई जिलाध्यक्ष विवेक अग्रवाल ने कहा कि मौके पर मौजूद सभी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, अन्यथा कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया जाएगा। छात्र नेता सत्येंद्र शर्मा ने इस घटना को किसान की बेटी के साथ मारपीट, बाल पकड़कर थप्पड़ मारना और महिलाओं का अपमान बताते हुए गंभीर अपराध करार दिया। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर संबंधित अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।


