शहर के कुछ हाई-प्रोफाइल स्कूल और कॉलेज के छात्र अपने ही संस्थान की सोशल मीडिया पर बदनामी का कारण बन रहे हैं। फर्जी प्रोफाइल बनाकर इंस्टाग्राम और फेसबुक पर डबल मीनिंग कंटेंट पोस्ट किए जा रहे हैं। दो महीने में साइबर पुलिस के पास 12 शिकायतें दर्ज हुई हैं। जांच में सामने आया है कि कई आरोपी नाबालिग हैं। इसलिए बच्चों के भविष्य को देखते हुए ज्यादातर मामलों में वॉर्निंग देकर समझौता करवाया दिया जाता है। ऐसे में पैरेंट्स को भी जागरूक होना पड़ेगा ताकि वे नजर रख सकें कि उनका बच्चा सोशल मीडिया पर क्या कर रहा है। काम की बात इंस्टाग्राम ने हाल ही में फैमिली सेंटर फीचर पेश किया है, जो माता-पिता को अपने बच्चे के अकाउंट पर निगरानी रखने की अनुमति देता है। इसमें इंस्टाग्राम पर समय सीमा तय करना, कौन-कौन फॉलो कर रहा है या रिपोर्ट कर रहा है और सेफ्टी सेटिंग एडजस्टमेंट शामिल है। संस्थान को अपने खुद का एक सोशल मीडिया क्लब बनाना चाहिए। जो ये चेक करें की उनके संस्थान के नाम से क्या गलत काम हो रहा है। ताकि समस्या के बढ़ने से पहले समाधान निकाला जाए। इस तरह की समस्या से बचने के लिए संस्थान को ब्रांड आइडेंटी एंड सेफ्टी सॉफ्टवेयर से काम करवाना चाहिए। बच्चे इस तरफ की शरारत इसलिए करते है, क्योंकि उनके पास क़ानूनी जानकारी नहीं होती है। ऐसे मामलों में अगर स्कूल का बच्चा ऐसा करता है, तो “धारा 67B” (तीन साल तक की कैद या दस लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं) वहीं अगर कॉलेज का बच्चा ऐसा करता है तो धारा 67A के तहत 5 साल तक की जेल या 10 लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। -मुकेश चौधरी, साइबर सुरक्षा के जानकार …थर्ड ईयर के छात्र ने महिला टीचर की फोटो डबल मीनिंग कैप्शन के साथ अपलोड की शहर के एक नामी कॉलेज की एक महिला टीचर ने पुलिस में शिकायत दी। जिसमें बताया कि उनके दोस्तों ने उन्हें इंस्टाग्राम का लिंक भेजा। उसपर कॉलेज का नाम लिखा हुआ था। जब उस लिखकर क्लिक किया तो देखा कि उनके ब्लैकबोर्ड पर बच्चों को पढाते हुए गलत एंगल से फोटो खींची गई है। उस पर डबल मीनिंग कैप्शन लिखा हुआ था। जब उसके कमेंट चेक किए तो उसमें काफी गन्दी-गन्दी बातें उनके बारे में और उनके कपड़ों के बारे में कही गई थी। उसके बाद मामले में कॉलेज के प्रिंसिपल को बताया, जब पुलिस ने जांच की तो देखा कि कॉलेज का ही एक थर्ड ईयर का स्टूडेंट उस फर्जी पेज को चला रहा था।


