छापे में मिली जानकारी के आधार पर कार्रवाई:सुकमा व कोंटा में पूर्व विधायक कुंजाम और 9 प्रबंधकों के 12 अलग-अलग ठिकानों पर एसीबी-ईओडब्ल्यू की छापेमारी

सुकमा जिले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की टीमों ने अलग-अलग 12 जगहों पर छापामार कार्रवाई की है। बताया जाता है कि जिन जगहों पर छापामार कार्रवाई की गई है, उनमें पूर्व विधायक व भाकपा नेता मनीष कुंजाम के रिश्तेदार भी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार पिछले महीने डीएफओ अशोक पटेल के घर पड़े छापे में मिले सुरागों के आधार पर एसीबी व ईओडब्ल्यू ने सुकमा व कोंटा में कार्रवाइ की।
बता दें कि तेंदूपत्ता बोनस वितरण में गड़बड़ी के मामले में पहले ही डीएफओ अशोक पटेल निलंबित किए जा चुके हैं। उनके घर पर पड़े छापे में मिले अहम सुरागों के आधार पर तेंदूपत्ता समितियों के 9 प्रबंधकों के 12 ठिकानों पर संयुक्त टीम ने छापामार कार्रवाई की। गुरुवार की सुबह टीम ने पूर्व विधायक मनीष कुंजाम के जिला मुख्यालय स्थित 2 घर व रामाराम स्थित पैतृक निवास में छापेमारी के साथ ही तेंदूपत्ता वन समिति गोलापल्ली प्रबंधक सत्यानारायण, कोंटा समिति प्रबंधक मोहम्मद शरीफ, पालाचलमा प्रबंधक सीएच रावणा, एर्राबोर प्रबंधक मितेंद्र सिंह, जग्गावरम प्रबंधक कवासी मनोज, पेद्दाबोड़केल प्रबंधक नुप्पो सुनील, फूलबगड़ी प्रबंधक राजेशखर पुराणिक, जगरगुंडा प्रबंधक रवि गुप्ता व मिचीगुड़़ा प्रबंधक कोरसा आयतु के घरों में टीम ने दबिश दी। देर शाम तक कार्रवाई जारी रही, जहां संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के अलावा अन्य कई दस्तावेज टीमों ने जब्त किए। फिलहाल एसीबी-ईओडब्ल्यू के अफसर कुछ भी कहने से इंकार कर रहे हैं, लेकिन आने वाले दिनों में कार्रवाई और सख्त होने की बात कही जा रही है। बोनस राशि निकालने के बाद भी नहीं किया था भुगतान दरअसल, सुकमा वनमंडल में साल 2021 व 2022 के तेंदूपत्ता बोनस की 6.50 करोड़ की राशि मिली थी। बीते साल राशि तेंदूपत्ता संग्राहकों को बांटी जानी थी, लेकिन अप्रैल व मई में राशि आहरण करने के बाद भी तेंदूपत्ता प्रबंधकों ने राशि का भुगतान संग्राहकों को नहीं किया। इसकी जानकारी जब पूर्व विधायक मनीष कुंजाम को मिली तो उन्होंने जनवरी में कलेक्टर व सीसीएफ से शिकायत करते हुए मामले की जांच की मांग की। शिकायत के बाद कलेक्टर व वन विभाग ने दो अलग-अलग टीमें बनाई और जांच के निर्देश दिए गए। जांच टीम ने पूरे मामले की जांच की गई। जिसमें तत्कालीन डीएफओ अशोक पटेल के शामिल होने की पुष्टि हुई और प्रारंभिक जांच में ही उन्हें गड़बड़ी का दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया गया। इसके साथ ही उनके घर पर पिछले महीने पड़े छापे में समिति प्रबंधकों के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद सुकमा व कोंटा के तेंदूपत्ता समितियों के प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

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