छेरछेरा तिहार: छत्तीसगढ़ की आत्मा, कृषि परंपरा का प्रतीक:पार्षद शिव वर्मा ने बताया सामूहिकता और अन्नदान का महत्व

छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और कृषि परंपराओं का प्रतीक छेरछेरा तिहार पौष पूर्णिमा के अवसर पर पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राजनांदगांव नगर निगम भाजपा के वरिष्ठ पार्षद शिव वर्मा ने इस पर्व को सामूहिकता, अन्नदान, सामाजिक समानता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक बताया। नवागांव में महिलाओं ने आत्मीयता से छेरछेरा तिहार मनाया। इस दौरान पार्षद राजा तिवारी ने अन्नदान किया। जिला पंचायत सदस्य विभा साहू ने भी अपने गांव में महिलाओं के साथ मिलकर अन्न एकत्रित किया। छेरछेरा तिहार छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण फसल उत्सव है। यह नई फसल के घर आने की खुशी को सामूहिक रूप से मनाने का अवसर प्रदान करता है। यह पर्व केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला एक मजबूत सांस्कृतिक सूत्र है। वर्मा ने बताया कि इस दिन बच्चे घर-घर जाकर ‘छेरछेरा’ मांगते हैं। लोग उन्हें नए धान, चावल, अनाज और अपनी श्रद्धा अनुसार पैसे दान में देते हैं। यह परंपरा समाज में अन्नदान की भावना को प्रोत्साहित करती है और यह संदेश देती है कि कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। छेरछेरा तिहार सामाजिक समानता का भी प्रतीक है, क्योंकि इस पर्व में जाति, वर्ग या आर्थिक स्थिति का कोई भेद नहीं होता। हर घर और आंगन से खुशियां निकलकर पूरे समाज में बंटती हैं, जिससे आपसी भाईचारा और सहयोग की भावना मजबूत होती है। यह पर्व प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का भी माध्यम है, जहां किसान अच्छी फसल के लिए धरती, जल, सूर्य और प्रकृति को धन्यवाद देता है। यह हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और लोक संस्कृति को सहेजने की प्रेरणा देता है।

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