उत्तराखंड के हिंदूवादी संगठन देवभूमि काली सेना के प्रदेश प्रमुख भूपेश जोशी ने दैनिक भास्कर एप से की गई बातचीत में कहा- “छोटी अवैध मजारों पर हमारा संगठन खुद कार्रवाई कर रहा है, जबकि बड़ी मजारों को प्रशासन बुलडोजर से हटाएगा। हम सरकारी जमीन पर बनी किसी भी मजार को बख्शने वाले नहीं हैं और इस कार्रवाई में दर्ज होने वाले मुकदमों से हमें कोई डर नहीं।” उन्होंने कहा कि मुकदमे योद्धाओं के गहने होते हैं। उनका दावा है कि प्रदेश की 99 प्रतिशत मजारें अवैध हैं और उनकी संगठन बिना डर कार्रवाई करता रहेगा। उन्होंने मसूरी, देहरादून और कोटद्वार की हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए प्रशासन की भूमिका, अवैध अतिक्रमण और अपने ऊपर दर्ज मुकदमों को लेकर बात की। अब सवाल जवाब में पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल: उत्तराखंड में मजारों को तोड़ने और दुकानों के नाम बदलने के वीडियो लगातार सामने आ रहे हैं। क्या इससे प्रदेश का माहौल तनावपूर्ण नहीं हो रहा? जवाब: अचानक कुछ नहीं हुआ है। यह सब सालों से चल रहा था, फर्क सिर्फ इतना है कि अब लोग चुप नहीं बैठ रहे। हम किसी समुदाय के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन देवभूमि में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह मजार हो या कुछ और। निजी जमीन पर कोई कुछ बनाता है, वह उसका मामला है। सवाल: मसूरी और देहरादून में मजार तोड़ने की घटनाओं को लेकर कहा जा रहा है कि यह कार्रवाई चोरी-छुपे की गई? जवाब: यह आरोप गलत है। मसूरी और देहरादून में जिन मजारों की बात हो रही है, वे निजी या सरकारी जमीन पर कब्जे के इरादे से बनाई गई थीं। कार्रवाई दिनदहाड़े हुई, रात के अंधेरे में नहीं। अगर मजार बनानी है तो अपने बाप-दादा की जमीन पर बनाइए, सरकारी जमीन पर नहीं। सवाल: आपका संगठन देवभूमि काली सेना महज 6 महीने पुराना है, फिर भी इतनी आक्रामक कार्रवाई क्यों? जवाब: संगठन नया है, लेकिन मैं पिछले 6-7 साल से हिंदू संगठनों से जुड़ा हूं। अवैध मजारों के खिलाफ पहले भी अभियानों में रहा हूं। अब तो गिनती भी छोड़ दी है। हम वही मजारें तोड़ते हैं जो अवैध और सरकारी जमीन पर बनी होती हैं। सवाल: वन विभाग की जमीन पर बनी मजारों के लिए आप किसे जिम्मेदार मानते हैं? जवाब: इसके लिए वन विभाग खुद जिम्मेदार है। अगर कोई गढ़वाल या कुमाऊं का लड़का विभाग की जमीन पर दुकान लगा दे, तो 10 मिनट में हटा दिया जाता है, फिर ये मजारें कैसे बन जाती हैं? इसका जवाब प्रशासन को देना चाहिए। सवाल: मसूरी में बाबा बुल्ले शाह की मजार को लेकर भी विवाद हुआ। आपका तर्क क्या है? जवाब: इतिहास साफ है- बाबा बुल्ले शाह की मौत पाकिस्तान में हुई थी, तो मजार भी वहीं होनी चाहिए थी। मसूरी में एक नहीं, 10-10 मजारें बना दी गईं। इसे ही हम लैंड जिहाद कहते हैं। सवाल: आपका दावा है कि ज्यादातर मजारें अवैध हैं। यह किस आधार पर कह रहे हैं? जवाब: अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूं कि 99 प्रतिशत मजारें अवैध होती हैं। हमारे पास इतना वक्त नहीं कि हर बार प्रशासन को सूचना दें। छोटी मजारों पर हम खुद कार्रवाई करते हैं, बड़ी मजारों पर सरकार बुलडोजर चलाती है। सवाल: कोटद्वार में दुकानों के नाम बदलने को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि पुलिस फोर्स तैनात करनी पड़ी। आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब: हमारा विरोध साफ है, काम करो, लेकिन अपने असली नाम से करो। बाहर लिखा होता है ‘दीपक हेयर ड्रेसर’ और अंदर काम करता है अब्दुल, यह नाम जिहाद है। भारत लोकतांत्रिक देश है, लेकिन धोखे का विरोध होगा। सवाल: आप कह चुके हैं कि अब तक 110 दुकानों के नाम बदलवाए गए हैं। इस दौरान हमले भी हुए? जवाब: हां, दो बार हमले हुए, लेकिन हम रुके नहीं। जब ‘केरल फाइल्स’ रिलीज हुई थी, तो मैंने अपने खर्चे पर 10 हजार महिलाओं को फिल्म दिखवाई थी। जो मुझे सही लगा, वो किया। सवाल: कोटद्वार की घटना में बजरंग दल की भूमिका पर आपका क्या रुख है? जवाब: बजरंग दल ने जो किया, हम उसका समर्थन करते हैं। विशेष समुदाय के लोग लैंड जिहाद, लव जिहाद, नाम जिहाद कर रहे हैं। इसका विरोध होगा और आगे भी होता रहेगा। सवाल: आप और आपके कार्यकर्ताओं पर लगातार मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। डर नहीं लगता? जवाब: बिल्कुल नहीं। मुकदमा हमारा गहना है, योद्धाओं का गहना। जो काम करेगा उसी पर केस होगा। घर बैठे आदमी पर कोई मुकदमा नहीं होता। मुझ पर भी कई केस हैं, गिनती अब याद नहीं। सवाल: आगे की रणनीति क्या है? जवाब: रणनीति एक ही है देवभूमि में अवैध अतिक्रमण नहीं चलेगा। चाहे कितने ही मुकदमे क्यों न हों, हम पीछे नहीं हटेंगे। 2 बड़े मामले, जिनसे उत्तराखंड का माहौल गरमाया… 1. कोटद्वार ‘बाबा शॉप’ नाम विवाद
26 जनवरी को कोटद्वार के पटेल मार्ग स्थित ‘बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर’ के नाम को लेकर विवाद शुरू हुआ। जिसमें बीते 30 वर्षों से दुकान चला मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद पर बजरंग दल से जुड़े युवकों ने नाम हटाने का दबाव बनाया। मामले में दीपक नाम का युवक दुकानदार के समर्थन में आया। जिसके बाद काफी बवाल हुआ। इस मामले में अब तक तीन FIR दर्ज हो चुकी हैं। मामला राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंचा, जहां राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी। 2. मसूरी बुल्ले शाह मजार तोड़फोड़ मामला
मसूरी के बाला हिसार क्षेत्र में 24 जनवरी 2026 को सूफी कवि बाबा बुल्लेशाह के नाम से बनी एक मजार को खुद को हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ता बताते हुए कुछ लोगों ने क्षतिग्रस्त कर दिया। सामने आए वीडियो में कुछ लोग हथौड़े से मजार तोड़ते और जय श्री राम के नारे लगाते दिखाई दिए। यह मजार वाइनबर्ग एलन स्कूल की भूमि पर स्थित बताई गई है। सईद बाबा बुल्ले शाह समिति की शिकायत पर मसूरी कोतवाली में तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। ———————– यह खबर भी पढ़ें : अंकिता भंडारी हत्याकांड- सीबीआई की अज्ञात VIP पर FIR: अफसरों का देहरादून-हरिद्वार में डेरा; फोरेंसिक सबूत-डिजिटल फुट प्रिंट से जुटाएगी सबूत अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब जांच की कमान पूरी तरह CBI के हाथों में आ गई है। CBI की दिल्ली स्थित स्पेशल क्राइम ब्रांच ने इस मामले में ‘अज्ञात VIP’ के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। वीआईपी एंगल की गहन जांच के लिए सीबीआई की टीम के दो सदस्य उत्तराखंड पहुंच चुके हैं, जो हरिद्वार में इस केस की जांच कर रही एसआईटी टीम से मुलाकात करेंगी और अब तक के सभी दस्तावेजों और सबूत को अपनी कस्टडी में लेगी। (पढ़ें पूरी खबर)


