छोटे कपड़ों वाली लड़कियों से ब्राह्मण की बेटी तक:2025 में सुर्खियों में रहे नेता-अफसर और बाबाओं के बयान, सुप्रीम कोर्ट तक में हुई बहस

साल 2025 गुजरने को है। इस साल मप्र के नेता और अफसरों के बयान राष्ट्रीय स्तर की सुर्खियां बने। किसी ने लड़कियों के छोटे कपड़ों को लेकर बयान दिया तो किसी ने ब्राह्मण की बेटी को लेकर टिप्पणी की। इनकी आलोचना भी हुई तो विरोध प्रदर्शन भी हुए। नेताओं के बयानों पर तो सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट तक में बहस हुई। पढ़िए साल 2025 के नेता-अफसर और बाबाओं के विवादित बयान…. अब सिलसिलेवार जानिए इन बयानों के बारे में छोटे कपड़े पहनी लड़कियां पसंद नहीं: कैलाश विजयवर्गीय
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने ये बयान इसी साल जून में इंदौर में दिया था। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा था- हमारे यहां महिला देवी का स्वरूप होती है। वो खूब अच्छे कपड़े पहनें, श्रृंगार करें। मुझे तो कम कपड़े पहनने वाली लड़कियां पसंद नहीं। कई लड़कियां मेरे पास सेल्फी खिंचाने आती हैं, तो मैं कहता हूं, बेटा पहले अच्छे कपड़े पहन कर आना फिर खिंचाना और मैं मना कर देता हूं। उन्होंने आगे कहा था कि विदेशों में कम कपड़े पहनने वाली लड़की को अच्छा मानते हैं, लेकिन हमारे यहां अच्छे कपड़े, श्रृंगार और गहने पहनने वाली लड़की को सुंदर माना जाता है। उनके इस बयान की आलोचन हुई थी। इसके बाद उन्होंने इसी साल 25 सितंबर को शाजापुर में एक सभा में उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की संयुक्त रैली पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि हम पुरानी संस्कृति के लोग हैं। पुराने जमाने में लोग अपनी बहनों के गांव का पानी तक नहीं पीते थे, लेकिन आज के हमारे नेता प्रतिपक्ष ऐसे हैं कि अपनी बहन का चौराहे पर चुंबन कर लेते हैं। ये संस्कारों का अभाव है। ये विदेश के संस्कार है। उनके इस बयान पर कांग्रेस समेत कई लोगों ने आलोचना की थी और इसे महिला विरोधी बयान करार दिया था। एमपी की महिलाएं सबसे ज्यादा शराब पीती हैं: जीतू पटवारी
इसी साल अगस्त के महीने में जीतू पटवारी ने ये बयान दिया था। उन्होंने भोपाल में अपने आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान उन्होंने कहा कि महिलाएं सबसे ज्यादा शराब, अगर पूरे देश में कहीं पीती हैं तो मध्य प्रदेश की हैं। मध्य प्रदेश को यह तमगा मिला है। यह समृद्ध मध्य प्रदेश का सपना देखने वाली बीजेपी ने प्रदेश के ऐसे हालात कर दिए हैं। देश में शराब की सबसे ज्यादा खपत कहीं हैं तो मध्य प्रदेश में है। पटवारी के इस बयान से नाराज भाजपा महिला मोर्चा की पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भोपाल, इंदौर और उज्जैन में राहुल गांधी और जीतू पटवारी के पुतले जलाकर प्रदर्शन किया। राहुल और जीतू पटवारी मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। सीएम डॉ. मोहन यादव ने इसे बहनों का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष माफी मांगें। वहीं, कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा- ये वही कांग्रेस है, जहां महिलाओं को तंदूर में जलाया जाता है और कहा जाता है…वाह क्या टंच माल है। विवाद बढ़ने पर पटवारी ने जबलपुर में कहा- नरेंद्र मोदी ने जो रिपोर्ट दी उस रिपोर्ट के आधार पर मैं कह रहा हूं, मेरा आरोप नहीं है। उन्होंने राष्ट्रीय परिवार हेल्थ सर्वे और सरकारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह बात कही। मोदी जी ने आतंकियों की ऐसी तैसी करने बहन को भेजा: शाह
मंत्री विजय शाह ने ये बयान 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम में दिया था। ऑपरेशन सिंदूर के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह और विदेश विभाग के सचिव विक्रम मिसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऑपरेशन और अन्य जानकारियां दे रहे थे। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विजय शाह ने ये टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि ‘उन्होंने( आतंकी) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।’ शाह ने आगे कहा- ‘अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा, कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। इस बयान के बाद शाह ने एक नहीं तीन बार माफी मांगी, लेकिन ये बयान उनके गले की फांस बन गया। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पहले मप्र हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने मप्र सरकार को बयान की जांच के लिए एक एसआईटी के गठन के निर्देश दिए थे। केस की सुनवाई करने वाले जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि आप पब्लिक फिगर हैं। एक अनुभवी नेता हैं। आपको बोलते समय अपने शब्दों पर विचार करना चाहिए। बोलते समय जिम्मेदारी से काम लें। सेना के लिए हम कम से कम इतना तो कर ही सकते हैं। ब्राह्मण की बेटी से संबंध नहीं तब तक आरक्षण खत्म नहीं: संतोष वर्मा
23 नवंबर को भोपाल में आयोजित अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी संघ के प्रांतीय सम्मेलन में आईएएस संतोष वर्मा ने ये बयान दिया थ। वे अजाक्स के नए प्रांताध्यक्ष चुने गए थे। आरक्षण की पैरवी करते हुए उन्होंने कहा था कि “एक परिवार में एक व्यक्ति को आरक्षण तब तक देना चाहिए, जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनता।” इस बयान के सामने आने के बाद बवाल मचा। ब्राह्मण समाज ने संतोष वर्मा से बयान के लिए माफी मांगने के लिए साथ ही सरकार से उनके खिलाफ एक्शन लेने के लिए भी कहा। इस बीच संतोष वर्मा ने कहा कि उन्होंने 27 मिनट भाषण दिया था और उनके भाषण की 2 मिनट की क्लिप को सार्वजनिक कर बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया। उन्होंने सामाजिक समरसता और रोटी बेटी के व्यवहार की बात की थी। इसके बाद उन्होंने कहा कि यदि किसी को उनके बयान से ठेस पहुंची है तो वे माफी मांगते हैं। समाज की नाराजगी को देखते हुए 26 नवंबर को सामान्य प्रशासन विभाग ने उन्हें नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा था। वर्मा ने 4 दिसंबर नोटिस का जवाब दिया। इसके बाद उनके दो और वीडियो सामने आए। इन वीडियो को लेकर भी बवाल मचा। भगवान चित्रगुप्त को मुछंदर बोले पंडित प्रदीप मिश्रा
साल 2025 में सीहोर के कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में रहे। 14 जून को महाराष्ट्र के बीड़ में कथा के दौरान उन्होंने भगवान चित्रगुप्त और यमराज के बारे में टिप्पणी की इससे कायस्थ समाज नाराज हो गया। इस कथा का वीडियो भी सामने आया था। इसमें वो शिवमहापुराण के प्रसंद का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि यमराज, तू मुझे पहचानता नहीं है। तेरे साथ तो मैं नहीं जाऊंगा। ऐ चित्रगुप्त फालतू की बात करना मत, सबका हिसाब रखना, मेरा हिसाब मत रखना। भगवान चित्रगुप्त को अपना आराध्य देव मानने वाले कायस्थ समाज ने इस टिप्पणी को अपना और अपने आराध्य का अपमान माना। समाज ने पंडित प्रदीप मिश्रा को 10 दिन के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की चेतावनी और आंदोलन की धमकी दी थी। कुछ लोगों ने कानूनी कार्रवाई और बहिष्कार की मांग भी की थी। चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद ने वीडियो जारी कर कहा- यह जाहिल व्यक्ति न तो कथावाचक है, और न ही व्यासपीठ पर बैठने के लायक है। टिप्पणी को लेकर बढ़ते विरोध को देखते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा को माफी मांगना पड़ी थी। उन्होंने कहा ऐसा नहीं है किसी समाज को या अन्य किसी व्यक्ति को बात कही गई हो। जो महापुराण की कथा महाराष्ट्र में चल रही थी, उसमें यमराज, चित्रगुप्त महाराज और भगवान शिव की भक्ति का प्रसंग चल रहा था।

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