जंगल में बसे संबलपुर में रोशनी पहुंचने से बच्चों ने भरी सपनों की उड़ान

भास्कर न्यूज | राजनांदगांव एमएमसी जिले के घने जंगल और पहाड़ों के बीच बसे ग्राम संबलपुर में बिजली पहुंची तो वह दिन किसी पर्व से कम नहीं था। लालटेन और चिमनी में जीवन गुजार रहे ग्रामीणों की आंखों में खुशी और चेहरे पर मुस्कान दिखी। आजादी के 78 साल बाद पहली बार यहां बल्ब जलने से अंधेरे के युग का अंत हो गया। मजराटोला, संबलपुर के साथ 17 वन ग्रामों के 540 परिवारों की जिंदगी बदल गई। यहां 6 करोड़ 80 लाख की लागत से 89 किलोमीटर 11 केवी लाइन, 22 किमी निम्न दाब लाइन, 95 विद्युत पोल और 25 वितरण ट्रांसफार्मर लगे है। कातुलझोरा, कट्टापार, बोदरा, बुकमरका, मुंदेली, गट्टेगहन, पुगदा, आमा पायली दशकों तक बिजली से वंचित थे जो अब रोशनी से जगमगा रहें है। संबलपुर के छात्र तमेश्वर ने बताया रोशनी सपने के सच होने जैसी है। अब हम रात में भी पढ़ सकते हैं। मुझे बड़ा अफसर बनना है। बिजली आने से बच्चों की पढ़ाई आसान हुई, गांव देश-दुनिया से जुड़ गया है। मोबाइल चार्ज होना, टीवी देखना और नई जानकारी पाना अब संभव हो सका है। मेहरूराम हिड़ामी ने कहा गांव में बिजली आई, हमने पटाखे फोड़े और मिठाइयां बांटीं। यह सपना हमने कई दशकों तक देखा था अंतिम गांवों तक पहुंची बिजली विगत 25 सालों में राजनांदगांव जिले में उपभोक्ता संख्या 1,18,027 से बढ़कर 2,51,353 हो गई। विद्युत कनेक्शन 1,25,373 से बढ़कर 3,03,942 तक पहुंचे। कृषक उपभोक्ता 7,308 से बढ़कर 52,336 लगभग 8 गुना वृद्धि हुई। बढ़ती मांग को देख जिले में 132/33 केवी उपकेंद्रों की संख्या 1 से 4 हो गई है, जिनकी कुल क्षमता 40 एमवीए से 263 एमवीए पहुंची। 33/11 केवी उपकेंद्रों की संख्या 14 से 49 हो गई, उनकी क्षमता 77.8 एमवीए से 366.55 एमवीए हुई। ट्रांसफार्मरों की संख्या 1,202 से बढ़कर 9,185 हो गई। सौर उर्जा को बढ़ावा देने केन्द्र सरकार की पीएम सूर्य घर योजना के तहत जिले में 10 गांवों को मॉडल सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जागा। पांच हजार से ज्यादा आबादी वाले राजस्व गांवों का चयन किया जाएगा। गैर सरकारी निवेश से अधिकतम सौर उर्जा क्षमता की स्थापना की जाएगी।

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