पंधाना के पूर्व विधायक और आदिवासी नेता राम दांगोरे ने गुड़ी क्षेत्र में वन विभाग द्वारा की जा रही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो ये बताया जाए कि हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में जंगल कटने पर जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई की गई। तीन हजार हेक्टेयर का जंगल था तो फिर उसकी कटाई में लगभग एक हजार करोड़ रुपए की लकड़ी भी निकली होगी। उन्होंने सवाल पूछा कि कटाई के बाद लकड़ी कहां गई, क्योंकि आदिवासी तो आज भी झोपड़ी में ही गरीबी के साथ जीवन यापन कर रहे है। जब भी जंगल कटता है तो आदिवासियों को जिम्मेदार बना दिया जाता है और उन पर कार्रवाई की जाती है। करोड़ों की लकड़ी के लिए जो जिम्मेदार हैं उन्हें सामने लाया जाए। दांगोरे ने यह बात पेसा कानून और वन अधिकार अधिनियम की बैठक में उठाई है। भोपाल में बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री मोहन यादव ने की थी। अफसरों को सस्पेंड करो, बढ़ने की बजाए घट रहा जंगल पूर्व विधायक दांगोरे ने सीएम के समक्ष मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में पहले 24 प्रतिशत जंगल था। वन विभाग को इस जंगल को बढ़ाकर 35 प्रतिशत करने का लक्ष्य दिया गया था। देश की आजादी के बाद से आज तक लक्ष्य हासिल करना तो छोड़ो, जो पहले था उससे भी कम हो गया है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि जंगल से कटी करोड़ों की लकड़ी जब तक सामने नहीं आती तब तक उन जिम्मेदार वन विभाग के अधिकारियों को निलंबित रखा जाए। साथ ही उसकी भरपाई इन अधिकारियों के वेतन से काटकर की जाए। यह अधिकारी जब लकड़ी खोजकर सामने ला देंगे तभी इन्हें ड्यूटी पर बहाल किया जाए। दावा- बैठक के डर से गुड़ी में की गई कार्रवाई पूर्व विधायक दांगोरे ने कहा कि वन विभाग ने पेसा बैठक से पहले जंगल से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने का मुख्य कारण यह था कि उन्हें पता था कि हम ये मुद्दा उठाएंगे। वन विभाग सामूहिक वन अधिकार नियम को खत्म करना चाहता है। जबकि इस नियम में खुले रूप से है कि किसी गांव से वन अधिकार क्षेत्र की जमीन है तो उस पर सामूहिक रूप से वनोपज लगाई जा सकती है।


