जगराओं नगर कौंसिल में सोमवार को चुनाव:सीनियर वाइस प्रेसिडेंट पद के लिए विधायक बनाम कांग्रेस की निर्णायक जंग

लुधियाना के जगराओं नगर की सत्ता के गलियारों में सोमवार का दिन बेहद निर्णायक होने वाला है। नगर कौंसिल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और वाइस प्रेसिडेंट पदों के लिए होने वाला चुनाव महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि शहर की सत्ता पर कब्जे का ‘सेमीफाइनल’ माना जा रहा है। चूंकि हाईकोर्ट ने अध्यक्ष पद के चुनाव पर फिलहाल रोक लगा रखी है, ऐसे में जो भी उम्मीदवार सीनियर वाइस प्रेसिडेंट चुना जाएगा, वही तकनीकी रूप से कौंसिल का वास्तविक मुखिया होगा और फाइलों से लेकर ठेकों तक के सभी अधिकार उसी के पास होंगे। हाईकोर्ट की रोक और बदला समीकरण: पूर्व अध्यक्ष जतिंदर पाल राणा को दूसरी बार बर्खास्त किए जाने का मामला फिलहाल अदालत में है, जिसका फैसला 20 जनवरी को आने की उम्मीद है। अध्यक्ष पद खाली होने के कारण सीनियर वाइस प्रेसिडेंट का पद ‘पावर सेंटर’ बन गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जतिंदर पाल राणा को हटाना प्रशासनिक से अधिक राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा था। अब सबकी नजरें सोमवार के चुनाव पर टिकी हैं, क्योंकि यही चुनाव तय करेगा कि अध्यक्ष पद पर फैसला आने तक शहर की कमान किसके हाथ में रहेगी। सत्ता का खेल और जनता की बदहाली: पांच साल के इस कार्यकाल पर नजर डालें तो जगराओं की राजनीति विकास के बजाय गुटबाजी की भेंट चढ़ी रही। सत्ता के इस खेल में शहर की जनता ने भारी कीमत चुकाई है। चार साल तक शहर कूड़े के ढेरों में डूबा रहा और विकास कार्य ठप रहे। नगर कौंसिल जनसेवा के बजाय नेताओं के लिए सत्ता संतुलन का अखाड़ा बनी रही। सोमवार का चुनाव भी इसी सत्ता संघर्ष की अगली कड़ी है, जिसमें जनता के मुद्दों से ज्यादा कुर्सी की अहमियत दिखाई दे रही है। पांच साल के कार्यकाल में गुटबाजी इतनी हावी रही कि विकास ठप रहा शहर चार साल तक कूड़े के ढेरों में डूबा रहा जनता मुद्दों से बाहर, राजनीति अंदर सिमटी रही। नगर कौंसिल शहर के लिए नहीं, सत्ता संतुलन के लिए चलती रही। निर्णायक होगा सोमवार:- देखना है कौन बनेगा पावर सेंटर सोमवार को होने वाला यह चुनाव केवल दो पदों की नियुक्ति नहीं है, बल्कि यह विधायक के नियंत्रण और कांग्रेस के संगठनात्मक वजूद की परीक्षा भी है। यह चुनाव तय करेगा कि अफसरशाही पर किसका नियंत्रण होगा और आने वाले समय में जगराओं की राजनीति किस दिशा में जाएगी। अब देखना यह है कि सोमवार की शाम को जगराओं की सत्ता का नया ‘पावर सेंटर’ बनकर कौन उभरता है और क्या नया समीकरण सामने आता है। कांग्रेस गुट बनाम कांग्रेस बागी -असली मुकाबला कांग्रेस (राणा गुट): फैसला हाईकमान करेगा, एक पर निर्णय के बाद बाकी ​पीछे हटेंगे वर्चस्व की जंग: असली मुकाबला अपनों में कौंसिल के 23 पार्षदों के गणित में कभी कांग्रेस 17 पार्षदों और दो निर्दलीयों के साथ अटूट बहुमत में थी। लेकिन, विधायक बनाम अध्यक्ष की खींचतान और पार्टी की आंतरिक कलह ने कांग्रेस को दो फाड़ कर दिया। वर्तमान में मुकाबला ‘कांग्रेस (राणा गुट)’ और ‘कांग्रेस बागी गुट’ के बीच है। राणा गुट की ओर से रविंदर पाल सिंह राजू, अमन कपूर बॉबी और रमेश मेशी सहोता के नाम चर्चा में हैं, जहाँ फैसला हाईकमान के अनुशासन पर टिका है। दूसरी ओर, बागी गुट से कंवरपाल सिंह और अमरजीत सिंह दावेदार हैं, जहाँ आपसी टकराव का खतरा बना हुआ है। कांग्रेस बागी गुट: चुनाव लड़ने की तैयारी, अपनों से टकराव हाउस का गणित और हर वोट की कीमत: जगराओं नगर कौंसिल के हाउस में विधायक सहित कुल 24 सदस्य हैं, लेकिन सोमवार को 21 सदस्य ही मतदान करेंगे। एक पार्षद विदेश में है और एक का निधन हो चुका है। बहुमत के लिए जादुई आंकड़े तक पहुँचने के लिए दोनों गुटों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वर्तमान स्थितियों में हर एक वोट की कीमत ‘सोने के भाव’ हो चुकी है और जोड़-तोड़ की राजनीति अपने चरम पर है। हाउस का गणित: कौन किस पर भारी

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