एशिया की दूसरी सबसे बड़ी अनाज मंडी लुधियाना के जगराओं में वीरवार देर रात हुई बारिश ने प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया। मंडी में अब तक केवल 58.9 प्रतिशत गेहूं का उठान हुआ है। खुले आसमान के नीचे रखी हजारों बोरियों पर तिरपाल तक नहीं डाला गया। जिससे गेहूं पानी में भीग गया। बारिश से भीगी बोरियों में रखा गेहूं जल्द ही खराब होने का खतरा है। इससे सरकार को लाखों रुपए का नुकसान हो सकता है। मंडी में अभी भी हजारों क्विंटल गेहूं खुले में पड़ा है। किसानों का कहना है कि बोरियों में बंद होने के बाद उनका नुकसान नहीं होता। लेकिन सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। भीगे गेहूं में कीड़े लगने का खतरा भीगे गेहूं की गुणवत्ता खराब हो जाती है। इससे उसका रंग और स्वाद बदल जाता है। बाजार में कीमत कम हो जाती है। भीगे गेहूं में कीड़े लगने का खतरा रहता है। बड़ी कंपनियां गेहूं की बारीक जांच करती हैं। भीगा गेहूं जम जाता है। लोगों के मुताबिक डिपूओं पर जाने वाला गेंहू अक्सर देखा जाता है कि वह गेंहू खराब होता है। जोकि सरकार गरीबों को देती है। समय पर धूप में न रखने से एक बोरी का वजन 10 किलो तक बढ़ सकता है। इससे भंडारण और सुखाने का अतिरिक्त खर्च आएगा। धीमी उठान और प्रशासनिक लापरवाही से सरकारी खजाने को नुकसान होगा।


