जगराओं में कचरा विवाद, सफाई यूनियन ने जताया विरोध:बोले-प्रशासन छिपा रहा नाकामी; कर्मचारियों को बलि का बकरा बना रहे

लुधियाना जिले के जगराओं नगर परिषद पिछले कई वर्षों से कचरे के ढेर में दबी हुई है, लेकिन न तो सत्ता में बैठे नेताओं को शर्म आ रही है और न ही नगर प्रशासन को कोई जवाबदेही याद है। शहर की बदबूदार हकीकत छिपाने के लिए हर बार सफाई कर्मचारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है, जबकि असली दोषी राजनीतिक नेता और नगर परिषद का फेल प्रशासन है। कचरे की जिम्मेदारी पार्षदों-प्रशासन की स्वच्छता संघ के जिला अध्यक्ष अरुण गिल ने खुला ऐलान करते हुए कहा कि अब बहुत हो चुका, सफाईकर्मी किसी की नाकामी ढोने के लिए पैदा नहीं हुए। उन्होंने कहा कि कचरे की जिम्मेदारी राजनीति करने वाले पार्षदों और निकम्मे प्रशासन की है, न कि उन कर्मचारियों की जो रोज अपनी जान जोखिम में डालकर गलियों और नालियों की सफाई करते हैं। कैमरों के सामने घर-घर जाकर कचरा उठाया अरुण गिल ने पार्षदों की पोल खोलते हुए कहा कि जैसे ही कचरे का मुद्दा उठता है, पार्षद वोटों की खातिर ड्रामा शुरू कर देते हैं। कैमरों के सामने घर-घर जाकर कचरा उठाया जाता है और फिर वही कचरा उन्हीं डंपों में फेंक दिया जाता है, लेकिन जब वही काम सफाई कर्मचारी करते हैं, तो उन्हें रोका जाता है एवं अपमानित किया जाता है और जनता के सामने बदनाम किया जाता है। प्रधान अरूण गिल ने कहा कि वोटों के पार्षद कभी कूड़े की रेहड़ी चलाने का ड्रामा करते है, तो कभी घर घर जाकर कूडा खुद उठाते है यह सब वोटरों को गुमराह करने के लिये करते है जैसे ही फोटो वीडियो बन जाए, तो गंगा नहाने निकल जाते है। संघर्ष सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं स्वच्छता यूनियन ने साफ चेतावनी दी, कि जो पार्षद जनता को भड़काकर सफाईकर्मियों की छवि खराब करेगा, उससे सीधी टक्कर होगी। अरुण गिल ने कहा कि अब संघर्ष सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़क से दफ्तर तक लड़ा जाएगा। नगर परिषद की बदहाली पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि पूरा प्रशासन बिना कप्तान के जहाज की तरह भटक रहा है। न कोई स्थायी स्वच्छता निरीक्षक है और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी। 23 वार्डों के लिए 23 सफाईकर्मियों की भर्ती का प्रस्ताव और टेंडर सिर्फ कागजों में दफन होकर रह गए हैं, जबकि शहर कचरे में सड़ रहा है। सफाई कर्मचारी स्थायी हड़ताल पर चले जाएंगे यूनियन ने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि कचरा डालने के लिए स्थायी डंप और अन्य लंबित मांगों का तुरंत समाधान नहीं किया गया, तो सफाई कर्मचारी स्थायी हड़ताल पर चले जाएंगे। अरुण गिल ने दो टूक कहा कि जब तक कचरा डालने की पक्की जगह नहीं मिलती, एक भी ट्रॉली कचरा नहीं उठेगा। उन्होंने चेतावनी दी, कि अगर कचरे से शहर में बीमारी फैली, बदबू से लोग परेशान हुए या हालात बिगड़े, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी पार्षदों और नगर परिषद के अफसरों की होगी, न कि सफाई कर्मचारियों की। इस मौके पर सफाई यूनियन के सचिव राजिंदर कुमार, प्रधान सन्नी सुंदर, प्रदीप कुमार, सोमवीर, सुरजीत सिंह, संदीप कुमार, अन्नल सिंह, बिक्रम कुमार, भूषण गिल सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।

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