पंजाब में किसान आंदोलन और सरकार के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। बुधवार को शंभू- खनौरी बार्डर से किसानों का मोर्चा हटाने, किसान नेताओं को गिरफ्तार किए जाने के बाद अब जगराओं के किसानों ने 26 मार्च को चंडीगढ़ कूच का ऐलान किया है। बता दें कि, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 3 मार्च को संयुक्त किसान मोर्चा से बैठक की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद से प्रदेश में किसान नेताओं की गिरफ्तारियों का दौर शुरू हो गया। सैकड़ों नेताओं को पुलिस स्टेशनों और जेलों में बंद किया गया है। 5 मार्च को चंडीगढ़ जा रहे किसानों को बैरिकेड्स लगाकर रोका गया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब 19 मार्च को केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक के बाद डल्लेवाल समेत सभी किसान नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। खनौरी और शंभू बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात कर किसान कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। केंद्र की नीतियों को लागू कर रही पंजाब सरकार – देहडका भारतीय किसान यूनियन एकता डकौदा के जिला अध्यक्ष जगतार सिंह देहडका और जिला सचिव इंद्रजीत सिंह धालीवाल का कहना है कि मान सरकार केंद्र की नीतियों को लागू करने में जुटी है। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार एमएसपी, सरकारी खरीद की कानूनी गारंटी और किसानों को कर्ज राहत देने से इनकार कर रही है। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि एक तरफ बातचीत का दिखावा किया जा रहा है, दूसरी तरफ दमनकारी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल से दिल्ली का रास्ता खोलने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उन्हें विकास विरोधी बता रही है। अब किसान 26 मार्च को चंडीगढ़ में बड़ा प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं। उन्होंने कहा कि पहले दिल्ली आंदोलन के कारण पंजाब में बीजेपी ने अपना राजनीतिक पारी को खत्म किया अब मान सरकार ने अपना दांव खेला है जो केजरीवाल की खास पार्टी को बहुत महंगा पड़ेगा। उन्होंने कहा कि 26 मार्च को संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर प्रदेश भर से बड़ी संख्या में भारतीय किसान यूनियन एकता डकौदा के कार्यकर्ता इस षड्यंत्रकारी अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए चंडीगढ़ पहुंचेंगे। इस दौरान तारा सिंह अछरवाल और तरसेम सिंह बासूवाल भी मौजूद थे।


