जगराओं में पनबस-PRTC कर्मचारियों ने निकाली रैली:बोले-विभाग खत्म करने की साजिश, सरकार ने 4 साल में एक भी कर्मचारी पक्का नहीं किया

पंजाब रोडवेज पनबस/PRTC कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जगराओं डिपो में गेट रैली आयोजित की गईं, जिसमें सरकार की वादाखिलाफी, दमनकारी नीतियों और निजीकरण का विरोध किया गया। यूनियन के स्टेट जॉइंट सेक्रेटरी जालोर सिंह गिल ने आरोप लगाया कि कच्चे कर्मचारी दशकों से संघर्ष कर रहे हैं। AAP ने सत्ता में आने से पहले झूठे वादों के आधार पर सरकार बनाई। उन्होंने धरनों में पहुंचकर कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और विभाग को मजबूत करने का आश्वासन दिया था। कर्मचारियों ने बसों में प्रचार कर AAP को सत्ता तक पहुंचाया, लेकिन चार साल बाद भी स्थिति पहले से बदतर है। गिल ने बताया कि सरकार के साथ 60 से अधिक बैठकें, मुख्यमंत्री के साथ 3 मुलाकातें और एक महीने में मांगें हल करने का लिखित भरोसा सब छलावा साबित हुआ। डेढ़ साल बीत चुके हैं, लेकिन न कोई नीति बनी और न ही कर्मचारी पक्के हुए। आंदोलनकारी कर्मचारियों पर दर्ज किए मुकदमे गिल ने यह भी आरोप लगाया कि जब कर्मचारी अपने हक मांगने सड़कों पर उतरे, तो सरकार ने बातचीत के बजाय पुलिस का इस्तेमाल किया। शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले कर्मचारियों पर गैर-कानूनी मामले दर्ज किए गए और धारा 307 जैसे गंभीर आरोप लगाकर जेलों में डाला गया। कई कर्मचारी अभी भी संगरूर जेल में बंद हैं। यूनियन ने कहा कि सरकार ने एक भी नई सरकारी बस नहीं चलाई, बल्कि किलोमीटर स्कीम के नाम पर निजी बसें उतारकर विभाग का निजीकरण कर रही है। सरकार के पास टायर, स्पेयर पार्ट्स, टिकट मशीन और कर्मचारियों के वेतन तक के पैसे नहीं हैं। पनबस-PRTC का सरकार पर 1200 करोड़ रुपये का मुफ्त यात्रा का बकाया है, जिसे जानबूझकर नहीं दिया जा रहा है ताकि विभाग को खत्म किया जा सके। आज भी जेल में बंद हैं आंदोलनकारी : सोहन सिंह डिपो प्रेसिडेंट सोहन सिंह ने कहा कि किलोमीटर स्कीम के विरोध में आवाज उठाने वाले नेताओं को घरों से उठाया गया, कर्मचारियों को बेरहमी से पीटा गया, कपड़े फाड़े गए और बाल खींचे गए। 176 कर्मचारियों को बिना वजह 5 दिन जेल में रखा गया, जबकि 20 कर्मचारियों पर धारा 307 लगाई गई, जिनमें से 10 आज भी संगरूर जेल में बंद हैं। यूनियन नेताओं ने कहा कि हर महीने सैलरी के लिए संघर्ष करना पड़ता है। इस महीने लोहड़ी का त्योहार नजदीक है, लेकिन कर्मचारियों को सैलरी मिलने की कोई उम्मीद नहीं। सरकार त्योहारों पर भाषण देती है, लेकिन मजदूरों के घर चूल्हा ठंडा है। डिपो सेक्रेटरी हरमिंदर सिंह सिद्धू ने ऐलान किया कि कर्मचारी काला रीबन पहनकर ड्यूटी करेंगे, ताकि आज़ाद देश में गुलाम बनाए जा रहे कर्मचारियों का विरोध दर्ज कराया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कच्चे कर्मचारियों की मांगें नहीं मानी गईं और संगरूर जेल में बंद साथियों को तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो 9 जनवरी को संगरूर बस स्टैंड पर ऐतिहासिक और शांतिपूर्ण कन्वेंशन कर अगला बड़ा संघर्ष शुरू किया जाएगा। इस दौरान जगराओं डिपो के सैकड़ों कर्मचारी मौजूद रहे और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

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