जगराओं में जहरीली दवाई पीकर आत्महत्या करने वाले ड्राइवर गुरपाल सिंह की मौत का राज आठ दिन बाद सामने आया। उसके कमरे की सफाई के दौरान बिस्तर के गद्दे के नीचे से सुसाइड नोट मिला। नोट में गुरपाल ने अपनी मौत के लिए चार लोगों को जिम्मेदार ठहराया है। इनमें दो बैंक कर्मी भी शामिल हैं। पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ थाना सुधार में केस दर्ज कर लिया है। सभी आरोपी फिलहाल फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में छापेमारी कर रही है। आरोपियों की पहचान बलजिंदर सिंह मुली निवासी जस्सोवाल, कुलदीप सिंह निवासी हीरा बाग जगराओं, बैंक कर्मी विकास कुमार चौरसिया और निर्मल सिंह के रूप में हुई है। थाना सुधार के एएसआई हरप्रीत सिंह ने बताया कि पीड़ित हरबंस सिंह निवासी जस्सोवाल ने शिकायत में बताया कि उसका बेटा गुरपाल सिंह कार ड्राइवर था। उसकी कार स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शाखा जगराओं में ठेके पर लगी थी। इलाज के दौरान हुई थी मौत
31 मार्च को गुरपाल ने जहरीली दवाई पी ली थी। उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पहले परिजनों को लगा कि गुरपाल मानसिक तनाव में था, इसलिए उन्होंने कोई शिकायत नहीं की। लेकिन आठ दिन बाद जब उसका कमरा साफ किया जा रहा था, तब गद्दे के नीचे से सुसाइड नोट मिला। नोट पढ़कर परिजनों के होश उड़ गए। सुसाइड नोट में गुरपाल ने लिखा कि बैंक कर्मियों समेत चार लोगों ने उसके आईडी प्रूफ, पासपोर्ट आदि लेकर उसके चेक पर जबरन साइन करवाए। चेक की रकम चार लाख रुपए थी। उसने लिखा कि यह चेक रद्द किया जाए। गुरपाल ने इन चारों को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया। पीड़ित पिता हरबंस सिंह ने बताया कि उसके चार बच्चे हैं। दो बेटे और दो बेटियां। एक बेटा दुबई गया था, जो वापस नहीं आया। गुरपाल ही उसका सहारा था। आरोपियों ने उसे छीन लिया। हरबंस ने बताया कि बेटे की शादी 2003 में हुई थी। लेकिन दो साल बाद उसका तलाक हो गया। तब से वह और उसका बेटा एक-दूसरे का सहारा बनकर जी रहे थे।


