भास्कर न्यूज | जशपुरनगर शहर के गौशाला परिसर में लगे पारंपरिक जतरा मेले में रोजाना हजारों लोगों की भीड़ जुट रही है। मेले की भीड़ में शहरवासी से ज्यादा ग्रामीण इलाकों के लोग हैं। ग्रामीण इलाकों में जशपुर जतरा को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। मेला देखने के लिए आसपास के गांव के ऑटो व पिकअप में भर-भरकर लोग पहुंच रहे हैं। बसंत पंचमी के दिन से चल रहे जतरा मेले में दस दिन बाद भी भीड़ में कमी नहीं आई है। मेले में भीड़ से ना सिर्फ मेले वालों को बल्कि ऑटो व पिकअप वालों की भी कमाई बढ़ी है। ग्राम घोलेंग, गिरांग, मंगाल, चिरवारी, बरपानी, आरा, नगेरापत्थर, लोदाम, पोड़ी, जामटोली, रूपसेरा, पतराटोली, गलौंडा, नेवारटोली, बघिमा, जरिया, मरगा, सोगड़ा, केसरा, मनोरा, पैकू, नीमगांव सहित अन्य इलाकों से जशपुर के लिए रोजाना ऑटो चलते हैं। आम तौर पर ऑटो चालक दिन में एक या दो ट्रिप करते हैं। पर इन दिनों ऑटो चालक दिन भर से 7 से 8 बार गांव के राउंड लगा रहे हैं। मेला देखने के लिए ऑटो में भर–भरकर लोग पहुंच रहे हैं। ऑटो वाले जिन मेले वालों को लेकर पहुंच रहे हैं, उन्हें वापस गांव तक छोड़ने में रात हो रहा है। रात के 9 से 10 बजे तक गांव की सड़कों पर चहल–पहल दिख रही है। आज भी जतरा मेले का इंतजार ग्रामीणों को साल भर से रहता है। यही वजह है कि मेला लगने के बाद गांव–गांव से लोग मेला देखने पहुंच रहे हैं। धान बिक्री का काम किसानों का पूरा हो चुका है। इसलिए किसान परिवार के लोगों के पास अब समय की कमी नहीं है। गांव में मेला किसी त्यौहार से कम नहीं है। गांव के हर घर से लोग मेले में जरूर पहुंचते हैं। यहां पहुंचकर लोग झूले का लुफ्त उठा रहे हैं और जरूरी सामान की खरीदारी कर रहे हैं। राज बैगा रोपन राम अगरिया बताते हैं कि मेला धांगर (घरेलू मजदूर) वर्ग का वह त्यौहार है, जब धांगरों को साल भर का पैसा मालिक एक साथ दिया करते थे।


