झारखंड विधानसभा परिसर में सभा सचिवालय के पदाधिकारियों व कर्मचारियों ने सरहुल-बाहा मिलन समारोह का आयोजन किया। समारोह में विधायक राजेश कच्छप ने कहा कि जनजातीय समाज प्रकृति की पूजा करते हैं। हमारे ईष्ट देव भी प्रकृति के रूप में पूजे जाते हैं। सूरज की रोशनी और धरा की सृजनशीलता के मिलन से पेड़-पौधों में नए फूल और फल लगते हैं। नए ऋतु के आगमन पर फसल लहलहाते हैं। इन सभी अवसरों को सम्मिलित रूप से प्रकृति पूजक जनजातीय समाज उत्सव के रूप में मनाते हैं। इसी रूप में सरहुल-बाहा पर्व जनजातीय समाज का एक बड़ा उत्सव है। मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि आज पूरी दुनिया पर्यावरण के संरक्षण में बड़ी-बड़ी योजनाएं बना रही है। सरहुल-बाहा पर्व हमें पर्यावरण संरक्षण की ओर प्रेरित करती है। इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने जनजातीय समाज की विभिन्न शैलियों पर नृत्य-संगीत का प्रदर्शन भी किया। कार्यक्रम का संचालन अनूप कच्छप ने किया। कार्यक्रम में विधानसभा के प्रभारी सचिव माणिक लाल हेम्ब्रम, सभा सचिवालय के पदाधिकारी व कर्मचारी सहित अन्य लोग थे।


