जनवरी में जारी होगी ड्रोन पॉलिसी; लैब, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बनेंगी:मप्र में अभी सड़क, राजस्व, माइनिंग सहित 13 क्षेत्रों में ड्रोन का हो रहा उपयोग,नमो ड्रोन दीदी योजना चालू है

मप्र सरकार जल्द ही ड्रोन टेक्नोलॉजी को लेकर अपनी नीति को अंतिम रूप देने जा रही है। जनवरी के पहले हफ्ते में ड्रोन पॉलिसी का ड्राफ्ट जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद सभी स्टेकहोल्डर्स से सुझाव लेकर जनवरी के अंत तक ड्रोन पॉलिसी को आधिकारिक रूप से लागू किया जाएगा। राज्य सरकार ने हाल ही में ड्रोन एक्सपर्ट्स से बातचीत की थी, जिसमें उनसे ड्राफ्ट पर विचार-विमर्श कर सुझाव मांगे गए थे। इस नीति के तहत ड्रोन की शिक्षा और प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को 8000-10000 रुपए तक की स्टाइपेंड राशि दी जाएगी। इसके अलावा, ड्रोन लैब बनाने वालों को सरकारी फंडिंग मिलेगी और ड्रोन से जुड़े स्टार्टअप को भी सरकार मदद करेगी। एक्सपर्ट्स का सुझाव – कर्नाटक की तर्ज पर करें काम
हाल ही में सरकार ने ड्रोन एक्सपर्ट्स से सुझाव लिए थे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मप्र को कर्नाटक की तर्ज पर अपनी ड्रोन नीति तैयार करनी चाहिए। कर्नाटक ने हाल ही में लैंड मैपिंग, सर्वे और इंस्पेक्शन के लिए ड्रोन का उपयोग शुरू किया है, जिसे मप्र भी अपने प्रशासनिक कार्यों में लागू कर सकता है। कर्नाटक ने पिछले साल देश का सबसे बड़ा 68000 वर्ग किमी लैंड मैपिंग का कॉन्ट्रैक्ट ड्रोन कंपनियों को दिया था। साथ ही मैपिंग, कृषि, डिफेंस जैसे क्षेत्रों के लिए ड्रोन उत्पादन पर कर्नाटक काम कर रहा है, वहीं गेमिंग और शौक के लिए उपयोग करने वालों के लिए भी ड्रोन बन रहे हैं। रिसर्च -डेवलपमेंट के लिए लैब बन रही हैं। रेत खनन की निगरानी में हो रहा है ड्रोन का उपयोग वर्तमान में सड़क निर्माण, जल संसाधन सर्वे, हेरिटेज साइट सर्वे, माइनिंग निगरानी, बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन मॉनिटरिंग, कृषि में फसल नुकसान सर्वे, प्रॉपर्टी डाटा संग्रहण, फारेस्ट सर्वे जैसे 13 क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक का उपयोग हो रहा है। माइनिंग में ड्रोन से निगरानी हो रही है कि कितनी रेत ठेकेदार ने इकट्ठा की या कितने क्षेत्र में खनन किया। मार्च में राज्य आजीविका मिशन के तहत नमो दीदी ड्रोन योजना शुरू हुई। ग्रामीण महिलाएं खेतों में कीटनाशक और उर्वरक छिड़काव का काम कर रही हैं। ड्रोन स्किल्ड युवा और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
सरकार का फोकस है कि युवा ड्रोन चलना -बनाना सीखें और रोजगार से जुड़ें। स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि सरकारी -निजी क्षेत्र के काम इन्हें मिलें। ट्रैफिक, कानून व्यवस्था और अपराधियों पर कार्रवाई जैसे मामलों में ड्रोन तकनीक की मदद ली जाए। सरकारी प्रोजेक्ट की निगरानी और नए प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाने में तकनीक उपयोग हो। बाहर की कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करें। रोजगार बढ़ें। ड्रोन तकनीक का उपयोग बढ़ाना है
राज्य सरकार का उद्देश्य इस नीति के माध्यम से युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान करना और ड्रोन तकनीक का उपयोग सरकारी कार्यों और खेती जैसे क्षेत्रों में बढ़ाना है। जनवरी के अंत तक पालिसी लाने की योजना है। एक्सपर्ट से मिले सुझाव नीति में शामिल करेंगे।
– संजय दुबे, एसीएस साइंस एंड टेक्नोलॉजी

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