जन्म कर्म मृत्यु का चक्र अनादि काल से चल रहा

लुधियाना| संयम शिरोमणि जैनभारती सुशील कुमार जी महाराज ने नूरवाला रोड जैन स्थानक में आयोजित कथा समारोह में श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि जन्म कर्म मृत्यु का यह चक्कर अनादि काल से चल रहा है। जन्म मरण के कारण भूत अष्ट कर्मों को नष्ट करने के लिए तप अग्नि का सहारा लेना चाहिए। जैसे अग्नि के स्पर्श से बीज दोबारा अंकुरित नहीं होता, अपनी उर्वरा शक्ति खो देता है। उसी प्रकार तप की ज्वाला से भस्मी भूत कर्म जन्म मरण का फल नहीं देते। महासाध्वी जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को अपना कर्तव्य निभाने में सजग रहने की प्रेरणा भी दी। वहीं साध्वी रत्न शुभिता जी महाराज ने भगवान पार्श्वनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव पर अपने मधुर भक्ति पूर्ण भजन पेश किए। पौष कृष्ण दशमी को वाराणसी में राजा अश्वसेन के घर महारानी वामा देवी ने एक पुत्र रत्न को जन्म दिया। इसकी संसार भर में खुशियां मनाई गई। देवलोक के इंद्र महाराज अपने देवी देवताओं के साथ माता-पिता को बधाई देने आए। सुमेरु पर्वत पर हर्षोल्लास से जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाता है। साध्वी जी ने बताया कि जैन शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान के जन्म पर तीन लोकों में प्रकाश होता है, स्वयं देवी देवता दुंदुभि बजाते हैं।

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