जब धरती पर अत्याचार बढ़ा, तब प्रभु ने लिया अवतार

श्री सिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर दिलबाग नगर में भक्तों की ओर से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। इसमें विद्वानों ने विधिवत पूजन कर कार्यक्रम की शुरूआत की। कथा वाचक अतुल शास्त्री ने कथा के चौथे दिन भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव, नंद बाबा, पूतना वध जैसी बाल लीलाओं का वर्णन किया। गुब्बारे और फूल-माला से सजे पंडाल में कथा व्यास ने कहा कि भगवान ने कंस के अत्याचारों को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए अवतार लिया। कहा कि परमात्मा ही परम सत्य है। भगवान संसार से जुड़े भी हैं और अलग भी हैं। आकाश में बादल रहता है। और बादल के अंदर भी आकाश तत्व है। बादल के गायब होने पर भी आकाश गायब नहीं होता। इसी तरह संसार गायब होने पर भी परमात्मा गायब नहीं होते। संसार की कोई भी वस्तु भगवान से अलग नहीं है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन कर धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की महत्ता पर व्याख्यान करते हुए कहा कि जब-जब अत्याचार, अनाचार व अन्याय बढ़ा है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है। अत्याचार को समाप्त कर धर्म की स्थापना को लेकर ही प्रभु का अलग-अलग रूपों में अवतार होता है। जब कंस ने सभी मर्यादाएं तोड़ दी, तो प्रभु श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। कथा व्यास अतुल शास्त्री ने कहा कि जीवन में अच्छे रास्ते पर जाना है, तो संकल्प लेना जरूरी है, हर बच्चे को अपने माता-पिता व गुरू की बातों को मानना चाहिए। जिन बच्चों के ऊपर माता-पिता का आशीर्वाद है, उन्हें संसार में सब कुछ प्राप्त है। हर एक माता-पिता को चाहिए कि अपने साथ बच्चों को भागवत कथा, सत्संग, कीर्तन में जरूर साथ लाएं। मानव जीवन में भाव से लिया राम नाम कल्याण करता है। मानव जीवन के हर उत्तर है हल राम नाम में है। राम चेतना है, राम आत्मा है, राम परमात्मा है। प्रभु नाम से बढ़कर कोई सुख सांसारिक सुखों में नहीं है। नाम सिमरण से मनुष्य के जीवन का कल्याण होता है। कथा के दौरान बासुदेव, यशोदा व श्रीकृष्ण के बाल-रूप की झांकी देख सभी श्रद्धालु जयकारा लगाते हुए नृत्य करने लगे। यहां अरुण अग्रवाल, राधे श्याम सेठ अमित तनेजा, सुभाष कपूर, विकास, राहुल, गीतांशू व अन्य श्रद्धालु उपस्थित थे। मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालु।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *