जब भक्त सच्चे मन से भगवान की शरण में जाते हैं, तो रक्षा करते हैं : शास्त्री

भास्कर न्यूज | इटखोरी इस संसार में भगवान धर्म और भक्तों की मान बचाने के लिए आए हैं। इसलिए संसार में मानव को अच्छे कर्म करनी चाहिए। उनकी पहचान कर्म से हीं होती है। जिनके कर्म बढ़िया होते हैं, उन्हें भगवान भी बड़ी से बड़ी संकट से बचा लेते हैं। यह बात बुधवार की रात इटखोरी टाल स्थित श्री श्री 1008 श्री माता नैना योगिनी धाम में आयोजित नौ दिवसीय वार्षिकोत्सव ज्ञान महायज्ञ के दौरान अपने प्रवचन में अयोध्या धाम से आई मानस किकंरी मिथलेश्वरी शास्त्री जी ने कही। उन्होंने आगे कहा कि दशरथ जी के घर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम जन्म लेकर आए थे। मगर दशरथ जी की मृत्यु के समय उनके एक भी पुत्र मौजूद नहीं रहे। उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म पर संकट आता है, तभी भगवान अनेकों रूप में कष्ट निवारण के लिए आते हैं। शास्त्री जी ने कही कि बेटा और बेटी में फर्क नहीं होनी चाहिए, मगर लोग बेटों को खूब शिक्षा दीक्षा दिलवाते हैं, और बेटियों को उससे दूर रखते हैं। मगर सच यही है कि बेटियां हीं सम्मान रखती हैं, जो बेटे नहीं कर पाते हैं। उन्होंने राम जन्म उत्सव कथा पर आधारित प्रवचन देकर उपस्थित श्रोताओं को भक्ति की शक्ति में डुबो दी। बीच-बीच में चौपाई गाकर उन्होंने श्रोताओं को तालियां बजाते हुए जयकारे भी लगवाए। बता दें कि यहां आयोजित यज्ञ में नित्य दिन कई प्रकार के नए अनुष्ठान किए जा रहे हैं। सुबह शाम माता नैना योगिनी की पूजा पाठ और आरती की जा रही है। वहीं यज्ञाचार्य एवं उप आचार्य द्वारा ध्वनि यंत्र पर वैदिक मंत्रोच्चार किए जा रहे हैं। नित्य दिन यहां विश्व शांति के लिए हवन की आहुति भी दी जा रही है। यज्ञशाला का परिक्रमा करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा गांव भक्ति की शक्ति में डूब गया है। यज्ञ का समापन 5 जुलाई को हवन पूजन और भंडारा के साथ किया जाएगा।

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