जब लोग मजाक उड़ाते थे, तब मोहाली स्टेडियम बना दिया:तीन साल में करवा दिया इंटरनेशनल मैच, किक्रेट डिप्लोमेसी से भारत-पाक को लाए करीब

पंजाब क्रिकेट के गॉडफादर यानी आईएस बिंद्रा का रविवार को निधन हो गया। उन्होंने मोहाली में जब क्रिकेट स्टेडियम बनाने का सपना देखा, उस समय लोग इस बात पर मजाक उड़ाते थे। लेकिन उन्होंने इस सपने को न केवल साकार किया, बल्कि आगे चलकर यही स्टेडियम पंजाब की पहचान बन गया। इस स्टेडियम की वजह से मोहाली को पूरी दुनिया में पहचान मिली। इतना ही नहीं, इस स्टेडियम ने भारत-पाक रिश्तों को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाई। भारतीय क्रिकेट को हरभजन सिंह, युवराज सिंह और शुभमन गिल जैसे नामी खिलाड़ी भी यहीं से मिले हैं। तीन साल में करवाया इंटरनेशनल मैच यह बात साल 1990 की है, जब आतंकवाद अपने आखिरी चरण में था। मोहाली का विस्तार हो रहा था, लेकिन लोग वहां घर बनाने से डरते थे। उस समय स्टेडियम की कल्पना तक नहीं की जा सकती थी। लेकिन उन्होंने चंडीगढ़ से सटे इलाके को स्टेडियम बनाने के लिए चुना। उन्होंने केवल तीन साल के भीतर 25 करोड़ रुपए की लागत से उस इलाके को स्टेडियम में तब्दील कर दिया। जब स्टेडियम बनकर तैयार हुआ तो वह बीसीसीआई अध्यक्ष बन गए थे, तब मोहाली में पहला वनडे मैच 1993 में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला गया था। उस समय स्टेडियम को बने तीन साल हो चुके थे। आईएस बिंद्रा आईएएस अधिकारी थे। 1974 में वह पटियाला के डीसी रहे और 1975 में पीसीए के वाइस प्रेसिडेंट बने। 1978 में उन्होंने पीसीए अध्यक्ष का पद संभाला था। वह 2014 तक पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (PCA) के अध्यक्ष रहे मोहाली स्टेडियम की एक अनोखी विशेषता यहां की फ्लडलाइट्स हैं। पास ही स्थित चंडीगढ़ एयरपोर्ट की सुरक्षा और विमानों से टकराव को रोकने के लिए लाइट के खंभों की ऊंचाई कम रखी गई, जिसके कारण पूरे मैदान में 16 खंभे लगाए गए। भारत पाक रिश्ते मधुर करने में भी रहा अहम 1986 में जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा हुआ था और ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड सुरक्षा कारणों से यहां खेलने को तैयार नहीं थे, तब बिंद्रा ने ही रास्ता निकाला था। उन्होंने पाकिस्तान के तत्कालीन सैन्य तानाशाह जनरल जिया-उल-हक को भारत दौरे पर आने का सुझाव दिया था, ताकि माहौल शांत हो और वर्ल्ड कप का रास्ता साफ हो सके। इसी बीच 1993 में मोहाली शुरू करने के बाद मात्र तीन साल के सफर के बाद ही 1996 विश्व कप और 2011 विश्व कप के ऐतिहासिक सेमीफाइनल मैचों की मेजबानी दिलाई। 1996 विश्व कप में यहां ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच दूसरा सेमीफाइनल खेला गया था। वहीं, 2011 विश्व कप सेमीफाइनल (भारत बनाम पाकिस्तान) के दौरान भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी यहां मौजूद थे, जिसे ‘क्रिकेट डिप्लोमेसी’ का नाम दिया गया था। आज यह स्टेडियम उनके नाम पर आई.एस. बिंद्रा स्टेडियम के रूप में जाना जाता है।

स्पीकर बोले- उनका योगदान पीढ़ियों को प्रेरित करेगा पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (पीसीए) व भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बी.सी.सी.आई.) के पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह बिंद्रा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि क्रिकेट खेल के लिए उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा। स्पीकर संधवां ने उनके निधन की खबर सुनकर गहरा शोक व्यक्त किया और परमात्मा के समक्ष प्रार्थना की कि ईश्वर इस दुख की घड़ी में दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहने के लिए शक्ति प्रदान करें।

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