जमशेदपुर की राज अदिति 38वें नेशनल गेम्स में तीरंदाजी में झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगी। उत्तराखंड में 31 जनवरी से 5 फरवरी तक होने वाले गेम्स में हिस्सा लेने के लिए राज अदिती रवाना हो चुकी है। उनके तीरंदाज बनने के पीछे पिता सूर्यमणि शर्मा का संघर्ष भी जुड़ा हुआ है। लॉकडाउन के वक्त सूर्यमणि शर्मा की जॉब छूट गई पर वो बेटी को तीरंदाजी की ट्रेनिंग दिलवाना चाहते थे। इसके लिए सूर्यमणि शर्मा ने बैंक से लोन लेकर बेटी के लिए तीर-धनुष का प्रबंध किया। छठी क्लास से आर्चरी की प्रैक्टिस कर रही राज अदिती जमशेदपुर के नामदा बस्ती की 18 वर्षीय तीरंदाज अदिति कुमारी के पिता प्राइवेट जॉब करते हैं। सूर्यमणि शर्मा ने बेटी की प्रतिभा को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का संकल्प लिया। छठी कक्षा से आर्चरी का अभ्यास कर रही राज अदिति ने अब तक कई पुरस्कार जीता है। वह फिलहाल बी.कॉम की पढ़ाई के साथ-साथ तीरंदाजी भी कर रही है। राज अदिती तीन बहनों में सबसे छोटी है। देश और झारखंड का नाम रोशन करना लक्ष्य राज अदिती ने भास्कर से बात की और कहा- मेरा एक मात्र लक्ष्य देश और झारखंड का नाम रोशन करना है। वहीं, परिवार को उम्मीद है कि सरकार से मदद मिलेगी, जिससे अदिति अपने सपनों को साकार कर सकेंगी। 1 लाख 60 हजार रुपए लोन लेकर खरीदा तीर-धनुष राज अदिती ने कहा-मुझे आर्चर बनना था और इसके लिए मैं शुरू से प्रयारत हूं। पिता प्राइवेट कंपनी में काम करते है। इसकी वजह से फाइनेंशियल प्रोब्लम हमेशा से रही है। किसी तरह बैंक से 1 लाख 60 हजार रुपए लोन लेकर पिता ने मेरे के लिए तीर धनुष खरीदा था। राज अदिती का एक ही सपना है कि वह झारखंड और अपने देश के लिए पदक जीत कर लाए। बर्मामाइंस के आर्चरी ट्रेनिंग सेंटर में ले रही ट्रेनिंग फगवाड़ा (पंजाब) के लवली प्रोफेशनल यूनवर्सिटी की छात्रा राज अदिती ने पिछले साल दिसंबर में जमशेदपुर में हुए सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में झारखंड टीम का प्रतिनिधित्व किया। कंपाउंड वर्ग की तीरंदाज राज अदिती 2018 से बर्मामाइंस स्थित आर्चरी ट्रेनिंग सेंटर में कोच रोहित कुमार से ट्रेनिंग ले रही है।


