जमशेदपुर स्थित दलमा अभ्यारण्य में बाघ के लगातार दिखने से गांवों में डर का माहौल है। आधा दर्जन से ज्यादा गांवों के लोग जंगल में जलावन लेने नहीं जा रहे। मवेशियों को भी चरने नहीं भेज रहे। रात में घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। बाघ का लोकेशन टेंगाडीह के जंगलों में बताया जा रहा है। इससे आसपास के आठ गांवों के लोग दहशत में हैं। वन विभाग और वाइल्ड लाइफ की टीम बाघ की तलाश में जुटी है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। पर्यटकों के इलाके से कुछ ही दूरी पर बाघ
बाघ का लोकेशन टेंगाडीह जंगल में बताया जा रहा है। यह दलमा के पर्यटकों के आने वाले इलाके के पास है। ऐसे में बाघ के वहां पहुंचने की आशंका है। वन विभाग न तो ग्रामीणों को सही जानकारी दे रहा, न ही मीडिया को। चार दिन पहले टेंगाडीह में बाघ देखा गया
जानकारी के मुताबिक, बाघ 20 दिनों से भूखा है। उसने आखिरी बार 30 जनवरी को तनकोचा में एक बछड़े का शिकार किया था। बाघ को हर 10-15 दिन में भोजन की जरूरत होती है। ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग ने सुरक्षा के कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। बाघ का सही लोकेशन भी नहीं बताया जा रहा। कांठजोड़ गांव के ठाकुर सिंह सरदार ने बताया कि चार दिन पहले टेंगाडीह में बाघ देखा गया था। जंगल में जलावन की लकड़ी लाने नहीं जा रहे
कांठजोड़, जोनाडीह, तुलीन, कदमझोर, मकुलाकोचा, टेंगाडीह समेत अन्य गांवों में डर का माहौल है। ग्रामीण जंगल में जलावन की लकड़ी लाने नहीं जा रहे हैं। इससे खाना बनाने में परेशानी हो रही है। लोग झुंड बनाकर गांव में रह रहे हैं। वन विभाग की टीम नहीं आ रही। ग्रामीण दयाल सिंह ने कहा कि वन विभाग ने सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। दलमा में 4 से 6 अप्रैल तक बटरफ्लाई फेस्टिवल
इधर, देशभर के स्कूल और कॉलेज के स्टूडेंट्स अब दलमा जंगलों में तितलियों की खोज करेंगे। अप्रैल में दलमा में पहली बार बटरफ्लाई फेस्टिवल का आयोजन वन विभाग द्वारा किया जाएगा। यह उत्सव 4 से 6 अप्रैल तक तीन दिनों तक चलेगा। जिसमें स्टूडेंट्स को तितलियों की प्रजातियों, उनके रहन-सहन, खानपान और पर्यावरणीय महत्व के बारे में गहराई से जानकारी दी जाएगी। वन विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों को तितलियों का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।


