खंडवा के पंधाना थाना क्षेत्र अंतर्गत बोरगांव चौकी के ग्राम टाकली कला में जमीन विवाद एक बार फिर हिंसक रूप लेता नजर आया। खेत में काम कर रही महिलाओं के साथ मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। एक महिला सीएचओ पर आरोप है कि उसने जमीन का कब्जा लेने के लिए फसल नष्ट कराई हैं। घटना गुरूवार दोपहर 4 बजे की बताई जा रही है। ग्राम टाकली कला में आदिवासी समाज के ठाकुर रूस्तम, कुंवरसिंह का परिवार अपनी जमीन पर खेती का काम कर रहा था। इसी दौरान दूसरी ओर की एक आदिवासी युवती कुछ लोगों को साथ लेकर खेत पर पहुंची। आरोप है कि, साथ आए लोगों ने खेत में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाने के इरादे से दवाई का छिड़काव करने की कोशिश की। जब खेत में काम कर रही महिलाओं ने इसका विरोध किया तो दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। देखते ही देखते झगड़ा शुरू हो गया। स्वास्थ्य विभाग में सीएचओ के पद पर पदस्थ मनीषा वासूले के साथ आए लोगों ने महिलाओं के साथ मारपीट की। इसी दौरान एक महिला को धक्का देकर खेत में गिरा दिया गया, जिससे और बवाल हो गया। विवाद के दौरान महिलाओं के बीच भी हाथापाई होने की बात सामने आई है। जमीन पर कब्जे के विवाद का मामला विवाद की जड़ जमीन का स्वामित्व है। खेत में काम कर रहा आदिवासी परिवार जमीन को अपनी बताते हुए किसी भी हाल में उस पर दावा छोड़ने से इनकार कर रहा है। वहीं दूसरी ओर दवाई छिड़काव करने पहुंची मनीषा वासुले कहना है कि जमीन उनकी है, इसी वजह से वे वहां पहुंचे थे। हालांकि, पीड़ित परिवार पहले भी इस मामले को लेकर एसपी कार्यालय और कलेक्टर कार्यालय में शिकायत कर चुका है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने के चलते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। पिंकीबाई बोलीं- पहले सीएचओ और फिर पुलिस ने पीटा सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में सीएचओ मनीषा वासुले को देखा गया है कि वह ठाकुर रूस्तम के परिवार की पिंकीबाई के साथ मारपीट करते नजर आ रही है। पिंकीबाई का कहना है कि, मनीषा वासूले ने उसके साथ बुरी तरह से मारपीट की। इसके बाद उसी ने डायल 100 बुला ली। पुलिस मुझे थाने ले गई, जहां महिला पुलिस मनीषा गोयल ने मेरे साथ मारपीट की। गार्ड रूम में ले जाकर मेरा गला मरोड़ने की कोशिश की। जमीन मालिक-वकीलों ने पैसे लिए, फिर दूसरे को बेच दी जमीन पर वर्तमान कब्जेदार ठाकुर रूस्तम के परिवार का कहना है कि, उन्होंने 2001 में 5 एकड़ को 61 हजार रूपए में ग्राम धनोरा निवासी पुटिया पिता नजरिया से खरीदी थी। लेकिन पुटिया ने रजिस्ट्री नहीं की। फिर 2019 में उसने जमीन की नई कीमत 8 लाख रूपए ले लिए। पंधाना के वकील संजय मंडलोई ने सौदा-चिट्ठी कराई और रजिस्ट्री के लिए हमसे 1 लाख 40 हजार रूपए लिए। इसके बाद जमीन नाम पर नहीं हुई तो खंडवा कोर्ट की वकील छाया शर्मा ने हमसे 40 हजार रूपए लिए। छाया शर्मा ही पुटिया की वकील थी, उन्होंने मिलीभगत करके पुटिया के पक्ष में फैसला करवा दिया। इधर, पुटिया के जमीन पर 2 लाख 65 हजार रूपए का लोन था। मनीषा वासुले नाम की एक महिला घर आई और खुद को बैंक की मैनेजर बताया। कहने लगी कि ढ़ाई लाख रूपए का लोन चुका दो वरना तुम्हारी जमीन नीलाम हो जाएगी। हमारे परिवार ने उस मनीषा वासूले को ढ़ाई लाख रूपए दे दिए। लेकिन बाद में पता चला कि हमारी जमीन को ग्राम मदनी निवासी मनीषा वासुले ने अपने नाम करवा लिया है।


