जम्मू-कश्मीर में रहस्यमयी मौतें- दिल्ली AIIMS की टीम राजौरी पहुंची:11 मरीजों से बात की, क्लीनिकल हिस्ट्री निकाली; अब तक 17 की मौत हुई

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में रहस्यमयी मौतों की जांच के लिए AIIMS और पीजीआई चंडीगढ़ की टीमें शनिवार को जीएमसी राजौरी पहुंचीं। टीमों ने 11 मरीजों से बात कर उनकी क्लीनिकल हिस्ट्री निकाली। टीम ने मरीजों के परिजन और गांव वालों से भी बात की। दिल्ली AIIMS के 5 डॉक्टर्स की टीम आज भी बधाल गांव का दौरा करेगी। टीम जिन 3 परिवारों में मौतें हुई हैं, उनके सील किए घरों और आसपास के इलाकों से सैंपल लेंगी। दिल्ली AIIMS की टीम में टॉक्सिकोलॉजी (जहर विज्ञान) एक्सपर्ट भी शामिल हैं। AIIMS के डायरेक्टर डॉ. एम श्रीनिवास की अध्यक्षता वाली टीम में क्लिनिकल टॉक्सिकोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. ए शरीफ, एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. शैलेंद्र कुमार, इमरजेंसी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जमाहद नायर, पीडियाट्रिक्स के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. जगदीश प्रसाद मीना, क्लिनिकल टॉक्सिकोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जावेद कादरी शामिल हैं। राजौरी में अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। बधाल गांव में 19 जनवरी को मोहम्मद असलम के छठे और आखिरी बच्चे की जम्मू मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई थी। इसके बाद गांव में हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी गई थी। 9 दिनों से कोई नया मामला सामने नहीं आया अधिकारियों ने बताया कि पिछले 9 दिनों में बधाल गांव से कोई नया मामला सामने नहीं आया है। अधिकारियों ने 87 परिवारों के 364 लोगों को गांव से राजौरी के तीन अलग-अलग सेंटर्स – गवर्नमेंट नर्सिंग कॉलेज, गवर्नमेंट बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल और गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया है। 182 अधिकारियों की टीम निगरानी में जुटी, सभी कार्यक्रमों पर रोक एक अधिकारी ने बताया कि बधाल में बचे हुए 808 घरों के 3700 लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गांव को 14 समूहों में बांटा गया है। इनकी निगरानी 182 अधिकारियों की बहु-विभागीय टीम कर रही है। गांव की सभी दुकानों को सील कर दिया गया है और कड़ी निगरानी में राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। सभी सरकारी और निजी कार्यक्रमों पर रोक लगा दी गई है। 200 लोगों को आइसोलेशन सेंटर भेजा गया 25 जनवरी को मृतकों के नजदीकी करीब 200 रिश्तेदारों को आइसोलेशन सेंटर भेजा गया था। करीब 14 मरीज अभी भी अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। उनकी हालत में सुधार हो रहा है। जीएमसी राजौरी के डॉक्टर 11 मरीजों का इलाज एट्रोपिन नामक एंटी पॉइजन दवाई से कर रहे हैं। 23 जनवरी को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने जहरीले पदार्थ को मौतों का कारण बताया था। 3 बहनों को एयरलिफ्ट करके चंडीगढ़ भेजा गया 22 जनवरी को तीन बहनों की तबीयत बिगड़ने के बाद राजौरी के गांव बधाल को कंटेनमेंट जोन बनाया गया था। तीनों बहनों की उम्र 16 से 22 साल के बीच है। पहले उन्हें गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) राजौरी में भर्ती किया गया था। हालत में सुधार न होने पर उसी दिन उन्हें जम्मू रेफर कर दिया गया था। तीनों की स्थित इतनी गंभीर थी कि उन्हें तुरंत एयरलिफ्ट करके PGI चंडीगढ़ भेजा गया। CM अब्दुल्ला पीड़ित परिवारों से मिलने गांव पहुंचे थे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला 21 जनवरी को पीड़ित परिवारों से मिलने गांव बधाल पहुंचे थे। मीडिया से बातचीत में उमर ने कहा था- यह कोई बीमारी नहीं है, इसलिए पुलिस इसकी जांच कर रही है। SIT गठित की गई है। केंद्र सरकार ने भी एक टीम तैनात की है। वो सैंपल कलेक्ट रही है। गृह मंत्रालय ने जांच के लिए इंटर मिनिस्ट्रियल टीम बनाई गृह मंत्री अमित शाह ने इन मौतों की जांच के लिए 18 जनवरी को इंटर मिनिस्ट्रियल टीम बनाने का आदेश दिया था। यह हाई लेवल टीम 19 जनवरी को गांव पहुंची थी। टीम को गृह मंत्रालय ही लीड कर रहा है। टीम में स्वास्थ्य, कृषि, रसायन और जल संसाधन मंत्रालय के एक्सपर्ट्स शामिल हैं। यह मौत की वजह की जांच के साथ ही आगे इस तरह की मौतें रोकने के लिए भी जरूरी कदम उठाएगी। इससे पहले 15 जनवरी को रियासी जिले के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) गौरव सिकरवार ने SIT गठित की थी। 11 मेंबरों की SIT की अध्यक्षता सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ऑपरेशन) वजाहत हुसैन कर रहे हैं। ——————————– रहस्यमयी बीमारी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… महाराष्ट्र के 3 गांवों के 60 लोग अचानक गंजे हुए, बच्चे और महिलाएं ज्यादा प्रभावित महाराष्ट्र के बुलढाना शहर में अजब बीमारी फैल रही है। यहां के 3 गांवों में अचानक 60 लोग गंजेपन का शिकार हो गए। शहर के शेगाव तहसील के बोंडगांव, कालवड़ और हिंगना गांवों में बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी लोगों के बाल झड़ने लगे हैं। इससे सभी गंजे होते जा रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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