जयपुर अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (JIFF) के दूसरे दिन का आकर्षण भारतीय और विदेशी फिल्मों की स्क्रीनिंग और दिलचस्प चर्चाएं रहीं। 80 फिल्मों की स्क्रीनिंग में 18 फीचर फिक्शन, 37 शॉर्ट फिक्शन और 9 डॉक्युमेंट्री शामिल थी, जिन्होंने दर्शकों को सिनेमा की अनोखी दुनिया से जोड़ा। इस साल की खास थीम ‘नवरत्न’ के तहत 9 आइकोनिक हिंदी फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है। शनिवार को तीन क्लासिक फिल्मों देवदास (1936), रंग दे बसंती (2006) और वीर-ज़ारा (2004) की स्क्रीनिंग हुई। राकेश ओमप्रकाश मेहरा के साथ विशेष सत्र
दूसरे दिन के सेशन में फिल्मकार राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने अपनी जर्नी और फिल्म निर्माण की सोच पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “हमने रंग दे बसंती नहीं बनाई, फिल्म ने हमें बनाया। उन्होंने बताया कि उनके पिता का थिएटर में टॉर्चमैन का काम उनके परिवार का सिनेमा से पहला जुड़ाव था।
मेहरा ने रंग दे बसंती के निर्माण के पीछे की प्रेरणा साझा की, जिसे मंडल कमीशन, तियानमेन स्क्वायर और वायुसेना के शहीद पायलटों को समर्पित किया गया था। उन्होंने कहा कि फिल्म ने उन्हें समाज और युवाओं की ऊर्जा से जोड़ दिया। मेहरा ने फिल्मों पर आए विवादों और कानूनी लड़ाइयों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि रंग दे बसंती से जुड़ा एक केस 19 साल बाद हाल ही में खत्म हुआ। इन अनुभवों ने उन्हें और अधिक सामाजिक कहानियां कहने के लिए प्रेरित किया। महामारी के बाद बदलते सिनेमा के परिदृश्य और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका पर विशेषज्ञों की चर्चा ने उद्योग में नई संभावनाओं पर रोशनी डाली।


