जयपुर के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल (SMS) में आज पहली बार रोबोट से किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी की गई। अब तक यहां रोबोट से दूसरी तरह की सर्जरी की जाती थी। इस ऑपरेशन को करने में करीब साढ़े तीन घंटे का समय लगा। ये ऑपरेशन एक महिला और उसके बेटे का किया गया, जिसमें मां ने अपने बेटे को किडनी दी। एसएमएस हॉस्पिटल में यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी और सीनियर प्रोफेसर डॉ. शिवम प्रियदर्शी ने बताया- 71 साल की महिला ने ये किडनी दी, जिसके 34 साल के बेटे की दोनों किडनियां खराब हाे चुकी थी। वह पिछले कुछ महीनों से डायलिसिस पर था। डॉक्टरों के मुताबिक युवक की किडनी हाई ब्लड प्रेशर के कारण खराब हुई थी। डॉ. शिवम प्रियदर्शी ने बताया इस सर्जरी में डॉ. नीरज अग्रवाल, डॉ. गोविंद शर्मा, डॉ. सोमेंद्र बंसल के साथ एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. वर्षा कोठारी, डॉ. अनुपमा गुप्ता और डॉ. सिद्धार्थ शर्मा ने सहयोग किया। दूरबीन से निकाली किडनी डॉक्टरों ने बताया- किडनी देने वाली मां का ऑपरेशन दूरबीन के जरिए किया। इस दौरान महिला के 5-6 सेमी. चीरा निकालकर किडनी निकाली गई। जबकि युवक के ऑपरेशन रोबोट के जरिए किया। जिसके 6-7 सेमी. का चीरा लगाकर उसके किडनी लगाई गई। इस पूरे प्रोसेस में करीब 3.30 घंटे का समय लगा। अब तक 800 से ज्यादा ट्रांसप्लांट एसएमएस सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के अधीक्षक डॉ. विनय मल्होत्रा ने बताया- एसएमएस में पिछले 10 सालों पिछले एक दशक में 800 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट कर चुके है। उन्होंने बताया- रोबोटिक तकनीक से सर्जरी का सबसे ज्यादा फायदा मरीज को होता है। जिसके चीरा बहुत छोटा लगता है और रिकवरी तेज होती है।


