शहर में जयपुर की टीम की ओर से 15 साल बाद किए गए डिकॉय ऑपरेशन ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। पीसीपीएनडीटी टीम ने इससे पहले वर्ष 2011 में एक डिकॉय ऑपरेशन किया था। इसमें सूरजपोल स्थित महावीर हॉस्पिटल के संचालक को भ्रूण लिंग परीक्षण करते पकड़ा था। इसके बाद जिले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उदयपुर की टीम ने शहर के किसी भी हॉस्पिटल में कार्रवाई नहीं की। कुछ साल बाद शहर के दो बड़े निजी अस्पतालों का नाम लेकर पैसे ऐंठने वाले दलालों को पकड़ा गया था। हालांकि, इसमें अस्पतालों की मिलीभगत सामने नहीं आई थी। दलाल उनके नाम का सहारा लेकर लोगों से वसूली कर रहे थे। जिले की पीसीपीएनडीटी की टीमें अब तक कुल 11 डिकॉय ऑपरेशन कर चुकी हैं। इनमें 23 आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई की गई थी। विभाग सकते में, अफसर बोले- अब सख्ती करेंगे
जयपुर की पीसीपीएनडीटी टीम ने गुरुवार को अमर आशीष हॉस्पिटल में भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़ किया। कार्रवाई में एक महिला चिकित्सक डॉ. नीना सक्सेना और दलाल पूजा सागर को पकड़ा। इस कार्रवाई के बाद विभाग सकते में है। इसका कारण यह है कि गत डेढ़ दशक से शहर में एक भी डिकॉय ऑपरेशन नहीं हुआ है। सीएमएचओ डॉ. अशोक आदित्य का कहना है कि अब नियमित रूप से सतर्कता बरतनी होगी। किसी भी तरह की गलती विभाग के लिए महंगी साबित हो सकती है। सवाल…विभाग ट्रैकर्स के भरोसे या कोई मिलीभगत सेल की डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेटर मनीषा कहती हैं कि 2017 में गुजरात में जो कार्रवाई की गई थी, उसमें दो आरोपी विनोद सेन व हिमांशु उदयपुर के थे। साल 2016 से 2026 के बीच ईडर, हिम्मतनगर, अहमदाबाद, राजसमंद, सिरोही में कार्रवाई की। सीएमएचओ डॉ. आदित्य ने बताया कि जिले में 108 सोनोग्राफी सेंटर पंजीकृत हैं। एक्ट के तहत ट्रैकर्स सहित उनकी रिपोर्ट समय पर पीसीपीएनडीटी सेल को दी जाती है। केवल ट्रैकर से इन्हें पकड़ना मुश्किल है। क्योंकि, सोनोग्राफी मशीन पर लगा ट्रैकर सब बताता है, पर डॉक्टर खुद अपने तरीके से कई बार देखकर कोड का इस्तेमाल भी कर लेते हैं। जांच में सहयोग तो 60 वर्ष उम्र के आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी नहीं जयपुर की टीम की ओर से उदयपुर में किए गए डिकॉय ऑपरेशन में आरोपी डॉक्टर नीना को गिरफ्तार नहीं किया गया है। इसको लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इसको लेकर भास्कर ने सीएमएचओ डॉ. अशोक आदित्य से सवाल किया। उन्होंने बताया कि कानूनन इस तरह के ऑपरेशन में 60 वर्ष से ज्यादा आयु वर्ग के आरोपी को तत्काल गिरफ्तार तब नहीं किया जा सकता, जब वह जांच में सहयोग कर रहा हो। आरोपी डॉक्टर ने अपना आरोप स्वीकार कर लिया है। आगे कोर्ट के आदेश और नियमानुसार पुलिस कार्रवाई करेगी।


