मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनआईटी) जयपुर में ‘ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) वाले बच्चों के लिए शिक्षा में आईसीटी उपकरणों की भूमिका’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) द्वारा प्रायोजित थी, जिसका उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उपकरणों की भूमिका को समझना और बढ़ावा देना था। इस कार्यशाला में देशभर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, एनजीओ प्रतिनिधियों, स्पीच थेरेपिस्ट, मनोचिकित्सकों और अभिभावकों ने भाग लिया। इस दौरान प्रतिभागियों ने ऑटिज्म पर जागरूकता, सहायक तकनीकों और शिक्षा में आईसीटी उपकरणों के प्रभावी उपयोग पर अपने विचार साझा किए। एमएनआईटी जयपुर की सहायक प्रोफेसर डॉ. मीनाक्षी त्रिपाठी ने DSIR के साथ चल रही परियोजना की जानकारी दी, जबकि संस्थान के शोध और परामर्श विभाग के डीन, प्रो. लव भार्गव, ने एमएनआईटी में इस विषय पर हो रहे शोध और पहलों पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव मुख्य वक्ताओं में डॉ. वंदना कालिया और डॉ. शशि कुमार (DSIR) शामिल रहे, जिन्होंने A2K+ योजना और विकलांग व्यक्तियों के लिए तकनीकी पहलों के महत्व पर चर्चा की। तकनीकी सत्रों में देशभर से विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें प्रो. गार्गी पी. सिन्हा (गोवा), प्रो. इंदु कुमार (एनसीईआरटी, दिल्ली), प्रो. जेसी अब्राहम (जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली), डॉ. सिम्मी कुरियन (जैन विश्वविद्यालय, कोच्चि), अभिषेक मिश्रा (इंदौर) शामिल रहे। इन सत्रों में आईसीटी उपकरणों की भूमिका, ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों की शिक्षा में तकनीक का योगदान और इसके व्यावहारिक उपयोग पर गहन चर्चा हुई। इस कार्यशाला का संचालन डॉ. प्रीति भट्ट ने किया, जिन्होंने प्रतिभागियों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा दिया। समापन सत्र में डॉ. सुशांत उपाध्याय (सहायक प्रोफेसर, एमएनआईटी जयपुर) ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। यह कार्यशाला ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से प्रभावित बच्चों की शिक्षा को समावेशी और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। तकनीकी नवाचारों और आईसीटी उपकरणों के उपयोग से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शिक्षा को अधिक प्रभावी और सुगम बनाने पर चर्चा ने इसे एक सफल आयोजन बना दिया।


