विद्याश्रम स्कूल के महाराणा प्रताप सभागार में ‘श्रीकृष्ण प्रेम रस’ नाट्य का मंचन किया गया। द दीवा’स क्लब की ओर से आयोजित इस आध्यात्मिक नाटिका में महाभारत फेम अभिनेता सुरेंद्रपाल सिंह और अभिनेत्री अनीता कुलकर्णी ने अपने सशक्त अभिनय से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को मंच पर सजीव कर दिया। इस आयोजन का उद्देश्य युवा पीढ़ी को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन से जोड़ना और उनकी शिक्षाओं को आज के युग के अनुरूप प्रस्तुत करना था। नाटक में भगवान श्रीकृष्ण के द्वारकाधीश स्वरूप से लेकर उनकी बाल लीलाओं तक की गाथा को अद्भुत तरीके से प्रस्तुत किया गया। मंचन के दौरान प्रेम, भक्ति और ईश्वर के प्रति समर्पण का ऐसा भाव प्रकट हुआ कि दर्शक भाव-विभोर हो गए। भव्य झांकी और भक्तिमय माहौल कार्यक्रम की शुरुआत श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की जीवंत झांकी से हुई, जिसने दर्शकों को अलौकिक अनुभूति कराई। हाथोज धाम के पीठाधीश्वर श्रबालमुकुंदाचार्य महाराज और बालाजी गौशाला संस्थान सालासर के अध्यक्ष रविशंकर पुजारी के पावन सान्निध्य में इस नाटिका का मंचन हुआ। महाभारत में अपने दमदार अभिनय के लिए प्रसिद्ध सुरेंद्रपाल सिंह ने श्रीकृष्ण के विभिन्न रूपों को प्रभावशाली ढंग से निभाया। उनके साथ अनीता कुलकर्णी ने भी अपने अभिनय से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। नाटक में प्रभु श्रीकृष्ण की जीवन गाथा को संगीत, नृत्य और संवादों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिससे भक्तों के मन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। कार्यक्रम में कई नामचीन अतिथियों ने शिरकत की, जिनमें प्रमुख रूप से एसकेजे ज्वेलर्स के डायरेक्टर संजय जोशी, जयपुर सांसद डॉ. मंजू शर्मा, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग के अतिरिक्त आयुक्त पंकज ओझा (RAS), निम्स यूनिवर्सिटी की डायरेक्टर शोभा तोमर, पंजाबी महासभा के अध्यक्ष गौ सेवक रवि नैयर, समाजसेवी चंद्रप्रकाश भाड़ेवाला, गोपेश शर्मा, विवेक गुप्ता, दिनेश कुमार यादव शामिल थे। नंदोत्सव के साथ हुआ समापन कार्यक्रम के अंत में नंदोत्सव का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने श्रीकृष्ण जन्म की खुशियां मनाईं। भक्तों ने भजन-कीर्तन के साथ माखन-मिश्री का प्रसाद ग्रहण किया और नृत्य-संगीत में डूबकर भक्ति का आनंद लिया। द दीवा’स क्लब की फाउंडर डायरेक्टर कीर्ति शर्मा और सह आयोजक फिल्म निर्माता गोपाल शर्मा ने बताया कि यह आयोजन आध्यात्मिकता, भक्ति और भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित करने का एक प्रयास था। भविष्य में भी इस तरह के आयोजनों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया।


