जयपुर मेडिकल कॉलेज परिसर में बुधवार को उस समय हड़कंप जैसा माहौल नजर आया, जब आतंकियों द्वारा कॉलेज पर कब्जा कर बंधक बनाए जाने का दृश्य सामने आया। हालांकि यह कोई वास्तविक आतंकी हमला नहीं था, बल्कि नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स (NSG) और राजस्थान पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “संपूर्ण सुरक्षा संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम” के तहत किया गया लाइव डेमो था। डेमो में दिखाया गया कि किस प्रकार आतंकवादी किसी संवेदनशील संस्थान पर कब्जा कर सकते हैं और ऐसी स्थिति में सुरक्षा बल किस रणनीति और आधुनिक तकनीक के माध्यम से जवाब देते हैं। एनएसजी के प्रशिक्षित कमांडो ने तेज़ कार्रवाई करते हुए आतंकियों को निष्क्रिय किया और बंधकों को सुरक्षित छुड़ाने का अभ्यासात्मक प्रदर्शन किया। के-9 डॉग टीम की ऑपरेशनल क्षमता ने खींचा ध्यान प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान एनएसजी की के-9 (डॉग स्क्वॉड) की क्षमताओं का भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया। पुलिस अधिकारियों और जवानों ने देखा कि कैसे एनएसजी डॉग “जब्बार” अपने हैंडलर के इशारे पर आतंकी पर हमला कर उसके हाथ से हथियार छीनता है। डेमो में यह भी दिखाया गया कि घायल आतंकी द्वारा दोबारा हमले की कोशिश करने पर के-9 टीम कैसे तत्काल प्रतिक्रिया देती है। वहीं, एक संदिग्ध वाहन द्वारा परिसर में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की काल्पनिक स्थिति में, जब्बार ने गाड़ी में कूदकर आतंकी का हथियार छीनते हुए हमले को विफल कर दिया। बम सर्च, एक्सरे मशीन और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल का प्रदर्शन कार्यक्रम के दौरान बम निरोधक दस्ते की कार्यप्रणाली भी प्रदर्शित की गई। के-9 टीम द्वारा बम सर्च करने के बाद, बॉम्ब स्क्वॉड ने बॉम्ब सूट, एक्सरे मशीन और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) के माध्यम से आईईडी को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया दिखाई। अधिकारियों ने बताया कि एक्सरे मशीन 25 मिलीमीटर मोटी धातु के भीतर छिपे विस्फोटक को भी स्कैन करने में सक्षम है। जब मौके पर आईईडी को निष्क्रिय करना संभव नहीं होता, तब संदिग्ध बैग को बॉम्ब इनवर्टर में डालकर न्यूट्रलाइज किया जाता है, जो करीब डेढ़ किलो तक के आईईडी को निष्क्रिय कर सकता है। वीआईपी सुरक्षा और ‘बुलेट कैचर’ घेरा भी दिखाया गया एनएसजी कमांडो ने वीआईपी मूवमेंट के दौरान अपनी भूमिका का भी ग्राउंड जीरो से प्रदर्शन किया। इसमें बताया गया कि कैसे उच्च पदस्थ व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए ऐसा सुरक्षा घेरा बनाया जाता है, जिसे भेदना लगभग असंभव होता है। इसी कारण इन कमांडो को ‘बुलेट कैचर’ भी कहा जाता है। एक माह चलेगा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स (NSG) और राजस्थान पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कंप्रिहेंसिव सिक्योरिटी एनहांसमेंट प्रोग्राम का उद्घाटन बुधवार को राजस्थान पुलिस अकादमी, जयपुर में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार शर्मा और एनएसजी के महानिदेशक भृगु श्रीनिवास ने संयुक्त रूप से किया। यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम एक माह तक चलेगा, जिसे जयपुर और जोधपुर में चरणबद्ध तरीके से आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य राजस्थान पुलिस की आतंकवाद-रोधी क्षमता, संकट प्रबंधन और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाना है। मेजर जनरल बोले- संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों से राजस्थान पुलिस को वास्तविक परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करने की क्षमता मिलेगी मेजर जनरल संदीप सिंह ने कहा कि इस तरह के संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों से राजस्थान पुलिस को वास्तविक परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करने की क्षमता मिलेगी। प्रशिक्षण के दौरान आधुनिक हथियारों, सामरिक योजना, खुफिया समन्वय और ऑपरेशन के दौरान नागरिकों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह कार्यक्रम भविष्य में किसी भी आतंकी या आपदा स्थिति से निपटने के लिए राजस्थान पुलिस को और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।


