हम लोग नींद में थे…अचानक शोर मचने लगा और जब आंख खोली तो बस के अंदर आग भभक रही थी। आगे सीट पर बैठा हर यात्री आग की लपटों से घिरा था। बस से निकलने का एक ही रास्ता था। लोग बसों की खिड़कियों से नीचे कूद रहे थे…। एक बच्चा भी था, जिसे बचाने के लिए उसकी मां ने उसे खिड़की से नीचे फेंका। जयपुर के भांकरोटा में शुक्रवार सुबह अजमेर हाईवे पर हुए हादसे में उदयपुर से जयपुर आ रही एक स्लीपर बस चपेट में आ गई थी। उदयपुर से लेकसिटी ट्रेवल की ये बस 34 यात्रियों को लेकर जयपुर आ रही थी। इस हादसे में बस सवार 21 लोग सुरक्षित हैं, लेकिन बाकी लोगों के बारे में पता नहीं चल पाया है। इतना ही नहीं बस के कंडक्टर चित्तौड़गढ़ निवासी कालूराम के बारे में भी किसी तरह की सूचना नहीं है। इस बस के ड्राइवर शाहिद की मौत हो चुकी है। दैनिक भास्कर ने इस बस में सवार यात्रियों से बातचीत की, जब ये हादसा हुआ तब ये दोनों यात्री देवीलाल मीणा (34) और इशताक खान (32) खिड़की तोड़कर बाहर निकले और 10 लोगों को बचाकर पास के खेतों में भागे। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सलूंबर के सराड़ा निवासी देवीलाल मीणा इस बस से जयपुर आ रहे थे। वे जयपुर में मजदूरी करते हैं। पढ़िए, उनकी जुबानी हादसे की पूरी कहानी- ऐसा लगा जैसे मौत के मुंह से निकलकर आए
मेरी (देवीलाल मीणा) बस में अपर की 3 नंबर स्लीपर सीट थी। मैं लेटा हुआ था। अचानक तेज धमाके के साथ आवाज आई। उठा तो आग का गोला बस में फैल चुका था। ऊपर वाली सीट से नीचे उतरता तो शायद जिंदा नहीं बच पाता। मैंने तुरंत खिड़की का कांच तोड़ा और कूदकर बाहर आया। इसके बाद इसी खिड़की से बाकी लोग एक के बाद एक नीचे कूदकर अपनी जान बचाने लगे। एक महिला के हाथ में उसका बच्चा था तो उसने खिड़की से बच्चे को फेंका, हम लोगों ने उसे पकड़ लिया। खिड़की से दो तीन-महिलाओं समेत 10 लोग बाहर निकले। इनमें कुछ लोगों को कूदते वक्त चोट लग गई। कुछ लोग झुलस भी गए थे। जैसे-जैसे लोग बस से बाहर निकले पास के खेतों में भागकर अपनी जान बचाई। बस में सवार बाकी लोग कहां से निकले और कैसे बाहर आए कुछ पता नहीं। मेरा बैग और जूते जल गए। लोग सामान की परवाह किए बिना अपनी जान बचाते हुए नजर आए। हम खेतों में खड़े होकर देख रहे थे कि कैसे लोग अपनी जान बचाकर इधर-उधर भाग रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि जैसे हम लोग मौत के मुंह से निकलकर आए हैं। आंखें खोली तो बस में आग लग चुकी थी
जयपुर में ईदगाह निवासी इश्ताक खान उदयपुर में लेबर कॉन्ट्रैक्टर हैं। वे भी बस में सवार थे। वे जयपुर अपने घर लौट रहे थे। उन्होंने बताया- मैं (इशताक खान) उदयपुर से जयपुर के लिए रवाना हुआ था। मेरी अपर में एस-9 में डबल स्पीलर सीट थी। लेकिन, मैं अकेला था। मैं नींद में था कि अचानक शोर मचने लगा। आंख खोली तो बस के अंदर आग लग चुकी थी। मैं घबरा गया, सामने मौत थी। आग लगातार पीछे की तरफ बढ़ रही थी। हाईवे पर जो भी गाड़ी उस टैंकर के आस-पास थी, वह आग की चपेट में आ गई थी। कुछ जलते हुए लोग सड़क पर दौड़ रहे थे तो कोई अपनी जान बचाता हुआ नजर आ रहा था। मैं उदयपुर के मोरवानिया में निर्माणाधीन होटल में लेबर सप्लाई करने गया था। यहां लेबर लगाने के बाद वे दोबारा जयपुर अपने घर लौट रहे थे। मैंने बस के शीशे को तोड़ा और बाहर कूदने की सोची, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाया। आगे नजर गई तो कई यात्री आग की चपेट में आ चुके थे। मैं डर गया और खिड़की से कूद गया। मेरे घुटने में चोट लगी और आग को देख में बस से दूर भागा। पीछे देखा तो बस की खिड़कियों से लगातार यात्री कूद रहे थे। बस का गेट बंद था, आगे से कोई यात्री निकल ही नहीं पाया। जो भी यात्री कूद रहे थे, वे आस-पास के खेतों की तरफ जान बचाने के लिए दौड़े। हालात ऐसे थे कि एक बार के लिए कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन के लिए जयपुर गए थे, बस से बाहर निकलने का रास्ता नहीं था
मैं (महेश लक्षकार) उदयपुर के मल्लातलाई में रहता हूं। डेढ़ साल पहले आयुर्वेद विभाग में मेरी पत्नी और चार लोगों की जॉब लगी थी। जयपुर आयुर्वेद मुख्यालय पर इनके डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन के लिए जाना था। हम सभी लोग साथ में ही उदयपुर से निकले थे। हमारे साथ चार कपल और थे। हमारे साथ बेटी भी थी। जयपुर के पास पहुंचते ही अचानक धमाका हुआ। पूरी बस में आग फैली हुई थी। मैंने सबसे पहली पत्नी को खिड़की से नीचे कूदाया और फिर बेटी को। बस से बाहर निकलने की कोशिश की तो पता चला कि गेट के पास एक कंटेनर आ गया है, जिसकी वजह से निकलने का रास्ता नहीं बचा। हमारे साथ जो लोग थे, वह खिड़की से नीचे कूद गए। लीलादेवरी और लक्ष्मण मीणा आग की चपेट में आ गए, जिन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया। इस आग में हमारे सारे डॉक्युमेंट और सामान जल गए। हम किसी तरह अपनी जान बचाकर भागे। बस की खिड़की से कूदते वक्त महिला डॉक्टर के दोनों हाथ फ्रैक्चर
बस की खिड़की से कूदते वक्त सरकारी महिला डॉक्टर यास्मीन खान (28) के दोनों हाथ फ्रैक्चर हो गए। जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल में उनका इलाज जारी है। राजसमंद के पूर्व पार्षद प्रकाश गमेती ने बताया कि डॉक्टर यास्मीन की पहले राजसमंद पोस्टिंग थी। वर्तमान में वे जयपुर के वैशाली नगर स्थित सरकारी आयुर्वेद हॉस्पिटल में कार्यरत हैं। वे किसी काम से राजसमंद आई थीं। प्रकाश ने ही अपने मोबाइल से उनका टिकट सिंगल स्लीपर में बुक कराया था। पूर्व पार्षद प्रकाश ने बताया कि डॉ. यास्मीन का बस में बैग सहित मोबाइल जल गया। वे तुरंत खिड़की से कूदी तो उनके दोनों हाथ में गहरी चोट लगी। उस वक्त संभालने वाला कोई नहीं था। सबको खुद की जान बचाने की पड़ी थी। बाद में एम्बुलेंस आई तो उन्हें हॉस्पिटल पहुंचाया। 21 यात्री सुरक्षित बाकी के मोबाइल बंद
लेकसिटी ट्रैवल के स्टाफ मोहम्मद युनूस ने बताया- बस में सवार 21 यात्रियों से फोन पर बातचीत हो चुकी है। सभी यात्री सुरक्षित है। बाकी यात्रियों के फोन बंद हैं। मालिक अब्दुल सलमान खान ने बताया कि टैंकर में ब्लास्ट होने के बाद आग का गोला सीधे बस ड्राइवर शाहिद पर आया और वह इस हादसे में बुरी तरह से झुलस गया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वह उदयपुर के खांजीपीर इलाके का रहने वाला था। वहीं बस कंडक्टर कालूराम के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। जयपुर में LPG हादसे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… बिना सिर-पैर की लाश किसकी?: टैंकर ब्लास्ट का अंतहीन दर्द, सरकार! बंद करो, मौत के यू-टर्न एक शव, जिसके न सिर और न पैर। सिर्फ धड़-धड़। दूसरे शव के नाम पर सिर्फ हडि्डयां। वो भी कट्टे में बांधकर लाई हुई। तीसरे में मांस के लोथड़े। जयपुर-अजमेर मार्ग पर हुए हादसे के बाद ये दिल दहलाने देने वाले दृश्य जयपुर के लोगों ने शुक्रवार को देखे। (पूरी खबर पढ़ें) जयपुर LPG ब्लास्ट- बिछिया से पहचानी बहन की लाश:95% जले युवक ने चाचा को काॅल किया, जले शव देखकर घरवाले बेहोश शुक्रवार (20 दिसंबर) को जयपुर का एसएमएस हॉस्पिटल दिनभर हादसे में झुलसे लोगों की चीखों और उनके अपनों के रोने की आवाज से गूंजता रहा। किसी भाई की राखी की डोर टूट गई तो किसी पत्नी का सुहाग उजड़ गया। कई पीड़ितों की हालत ऐसी थी कि उन्हें देख घरवाले बेहोश हो गए। पूरी खबर पढ़िए


