बोकारो के सियालजोड़ी थाना क्षेत्र स्थित सूर्योडीह निवासी इंद्रजीत महतो दिव्यांग हैं। हालांकि इसके बाद भी पुलिस विभाग के सिस्टम ने उन्हें परेशान कर दिया है। पेशे से किराना दुकान संचालक इंद्रजीत की गलती सिर्फ इतनी है कि सामान देने के बाद उन्होंने ग्राहक से पैसा अपने अकाउंट में ऑनलाइन लिया। इसके बाद 12 सितंबर को उनके अकाउंट को फ्रीज कर दिया गया। बैंक जाकर पड़ताल की तो पता चला कि साइबर ठगी से संबंधित एक मामले में उनके अकाउंट को फ्रीज किया गया है। इसके बाद वह बोकारो साइबर थाना पहुंचे। महीने में 6 बार बोकारो साइबर थाना का चक्कर लगाया। इसके बाद रांची साईबर थाना जाने को कहा गया। इंद्रजीत पहली बार 11 नवंबर को रांची साइबर थाना पहुंचे। पुलिस अधिकारियों के समक्ष गुहार लगाई। पुलिस पदाधिकारियों ने 24 घंटे में बैंक को ई-मेल भेजकर अकाउंट चालू कराने का आश्वासन देकर वापस बोकारो भेज दिया। 9 दिसंबर को दूसरी बार इंद्रजीत रांची साइबर थाना पहुंचे। फिर वही आश्वासन देकर वापस बा भेज दिया गया। 23 दिसंबर को तीसरी बार रांची पहुंचे, लेकिन इस बार भी आश्वासन ही मिला। अकाउंट से हुआ है 800 रुपए का ट्रांजेक्शन, गाड़ी भाड़ा में अबतक खर्च कर चुका है 12 हजार इंद्रजीत ने बताया कि अकाउंट में सामान लेने के एजव में ग्राहक ने 800 रुपए का ट्रांजेक्शन किया है। वहीं रांची आने के लिए वह अबतक 12 हजार रुपए खर्च कर चुका है। उसने बताया कि दिव्यांग होने की वजह से रांची आने के लिए बोकारो से गाड़ी बुक कराना पड़ता है। ऐसे में एक बार 4 हजार का खर्च आता है। अबतक वह सिर्फ भाड़ा में 12 हजार खर्च कर चुके हैं। पुलिस की आेर से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। सीढ़ी से ऊपर-नीचे करता रहा 12 सितंबर को अकाउंट फ्रीज, महीने में छह बार दौड़ा बोकारो साइबर थाना, तीन बार रांची भी लगा चुका है चक्कर मंगलवार को ऑफिस में घुसने से पुलिस ने रोका, न्याय की आस में गेट पर बैठा रहा दिव्यांग, मिला सिर्फ आश्वासन ही। दिव्यांग इंद्रजीत मंगलवार को कचहरी चौक स्थित पुलिस कंट्रोल रूम परिसर में हाथ के बल पर चल कर पहुंचे। ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों ने कभी कहा कि ऊपर जाइए, तो कभी नीचे। वह सीढ़ी से ऊपर-नीचे करते रहे, लेकिन किसी को उनकी परेशानी पर तरस नहीं आई।


