सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ज्यूडिशियरी में बार और बेंच एक सिक्के के दो पहलू हैं, जिनका उद्देश्य केवल न्याय की खोज करना है। हमारा प्रयास हर मामले में सच्चाई का पता लगाना है। उन्होंने कहा, ‘जहां न्यायाधीश यह तय करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करते हैं कि याचिका लगाने वालों के साथ कोई अन्याय न हो, वहीं बार काउंसिल पर भी गुणवत्तापूर्ण सहायता प्रदान करने की समान जिम्मेदारी है।’ जस्टिस ने कहा कि मुझे यकीन है कि भारत के पास जो विद्वान बार है, वह न्यायपालिका के लिए बहुत बड़ी संपत्ति है। दरअसल, जस्टिस सूर्यकांत मंगलवार को अखिल भारतीय वरिष्ठ अधिवक्ता संघ के आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के 4 जस्टिस- जस्टिस मनमोहन, जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस के विनोद चंद्रन को सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में प्रमोट किए जाने पर सम्मानित किया। कार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमानी, बार संघ के अध्यक्ष और सीनियर एडवोकेट पी विल्सन और बार महासचिव सीनियर एडवोकेट आदिश सी अग्रवाल भी मौजूद थे। कानून मंत्री बोले- स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की प्रमुख भूमिकाएं
केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा- स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व प्रमुख भूमिकाएं हैं, जिन्हें कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका को निभाना है। जिससे यह तय किया जा सके कि प्रत्येक नागरिक को संपूर्ण विकास का लाभ मिले।


