तस्वीर पानी में आर्सेनिक की अधिकता वाले दुर्ग संभाग मुख्यालय से करीब 90 किमी दूर ग्राम कौड़ीकसा की है। वहां कई बुजुर्गों के हथेली और पैर के तलवे इतने सख्त और गठीले हो गए हैं कि बेकार खाल को टंगिया से निकालते हैं। युवाओं को किडनी-लिवर से संबंधित शिकायतें ज्यादा हैं। महिलाओं को गर्भाशय, गठिया, नस संबंधी परेशानी। यहां 25-30 साल के युवा लकवाग्रस्त हो रहे हैं। पूर्व सरपंच युवराज तारम, यशवंत, सोनझरिया और भारत सोनझरिया के हाथ-पैर के तलवे में बड़ी सख्त गांठें हैं। सेवा सिन्हा और पंचराम कोरटिया के हाथ-पैर के नाखून सड़ रहे हैं। हितेश ध्रुव, राजकुमार ध्रुव और सेवा सिन्हा के हाथ-पैर में बड़े-बड़े चकत्ते हैं। बालकृष्ण कारटे (16), परमेश्वर सिन्हा (40) और प्रकाश सिन्हा (45) लकवे से पीड़ित हो गए हैं। कम उम्र में मौत के आंकड़े भी परेशान करने वाले हैं। प्रकाश ने खुदकुशी कर ली। इंद्रजीत शाह कुंजाम (28 साल), रोहित कौशिक(45), जितेंद्र यादव(36), दशरू फरदिया(40), सुकालू राम, भुनेश्वरी तारम (48) व बिलास सिन्हा चल बसे। दावा-23 गांव को नदी से पानी, सच-सप्लाई कम, आर्सेनिक वाला पानी पी रहे निर्मल साहू की रिपोर्ट दुर्ग संभाग मुख्यालय से करीब 90 किमी दूर अंबागढ़ चौकी के पास ग्राम कौड़ीकसा है। करीब 2500 की आबादी वाले इस गांव के हर घर में कोई न कोई बीमार है। चर्म रोग तो आम है। बच्चे, बड़े, बुजुर्ग हो या महिलाएं, हर किसी के पूरे शरीर पर गहरे रंग के दाग और चकत्ते हैं। इसकी वजह है इस गांव के भूजल में आर्सेनिक की मौजूदगी। आज भी कौड़ीकसा में सैकड़ों लोगों की जिंदगी पर संकट है। इस परेशानी के उपाय के लिए रिमूवल प्लांट से शुद्ध पानी आपूर्ति की व्यवस्था नाकाफी रही तो शासन ने अंबागढ़ से शिवनाथ नदी से पानी लिफ्ट करने मल्टी विलेज स्कीम बनाई। कौड़ीकसा समेत 23 गांवों को नदी का पानी पहुंचाया जा रहा है। सवाल है कि जब 8 किमी दूर नदी से गांव में पानी आ रहा है, तो आज भी लोग आर्सेनिक की वजह से कई बीमारियों से क्यों पीड़ित हैं? दो-चार नहीं, सैकड़ों की संख्या में। गांव के एनिशपुरी गोस्वामी और पूर्व जनपद उपाध्यक्ष नरोत्तम देहारी का कहना है कि पर्याप्त पानी नहीं आने के कारण गांववालों के सामने दो ही विकल्प हैं या तो आज ही प्यासे मर जाएं या तिल-तिल कर कुछ वर्षों बाद। उन्होंने मौत का यह दूसरा रास्ता चुना है। लोग फिर से आर्सेनिक युक्त पानी का इस्तेमाल करने लगे हैं। आर्सेनिक रिमूवल प्लांट खराब, उपकरण चोरी, गांव में गुजर लायक पानी नहीं पहुंच रहा पूर्व सरपंच युवराज तारम ने बताया कि गांव के भूजल में आर्सेनिक होने की जानकारी पहली बार वर्ष 2001-02 में मिली। गांव के समृद्ध लोगों को चर्म रोग हुआ तो भोपाल में जांच कराई। इसके बाद शासन की ओर से 26 लोगों को जांच के लिए भोपाल भेजा गया। पुष्टि होते ही सरकार ने गांव के सभी बोरिंग उखाड़ दिए गए। कुएं बंद कराए। गांव में ग्राउंड वाटर आर्सेनिक रिमूवल के 3 प्लांट लगाए गए। हालांकि आज तीनों कबाड़ हो गए हैं। उपकरण, मोटर पंप चोरी हो गए हैं। खास तरह की केमिकल से भरी बोरियां आज भी पड़ी है। आर्सेनिक कई गंभीर बीमारियों की वजह: भिलाई तकनीकी संस्थान के एप्लाई केमेस्ट्रिी विभाग के प्रमुख डॉ. संतोष सार बताते हैं आर्सेनिक वाला पानी का लंबे समय तक पीने से विषाक्तता या आर्सेनिकोसिस होता है, जिससे त्वचा, मूत्राशय, गुर्दे या फेफड़े का कैंसर या त्वचा की बीमारियां (रंग परिवर्तन, और हथेलियों और तलवों पर सख्त धब्बे), या पैरों की रक्त वाहिकाएं अवरुद्ध, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और प्रजनन संबंधी विकार होते हैं। वोल्टेज डाउन के चलते पेयजल आपूर्ति में परेशानी आ रही
कौड़ीकसा सहित आसपास के गांवों के भूजल में आर्सेनिक है। 20 साल से भी ज्यादा हो गए हैं, गांव वालों को कुएं और बोरिंग का पानी पीने की मनाही है। नदी से पानी सप्लाई हो रही है। वोल्टेज डाउन होने के कारण पेयजल आपूर्ति बाधित हो रही है।
-छत्रपाल ध्रुव, एसडीओ, पीएचई अंबागढ़ चौकी
ग्रामीणों की ओर से स्वास्थ्य विभाग को कोई शिकायत नहीं की गई है। हमने भी न कोई सर्वे कराया है न कोई रिपोर्ट है। यह समस्या तो पुरानी है। गांव में तो नदी से पानी पहुंचाया जा रहा है।
-डॉ. एसआर मंडावी, सीएमएचओ, अंबागढ़


