भास्कर न्यूज | डौंडी केंद्र सरकार के जातिगत जनगणना कराने के फैसले से सर्व पिछड़ा वर्ग समाज में खुशी की लहर है। समाज पिछले 20 वर्षों से 27% आरक्षण लागू करने की मांग कर रहा था। इसके लिए रैली, आमसभा और चक्काजाम जैसे आंदोलन किए गए। बार-बार ज्ञापन देकर सरकार को अवगत कराया गया। अब सरकार ने गंभीरता से विचार कर फैसला लिया है। समाज का कहना है कि इस फैसले से केवल पिछड़ा वर्ग समाज का हित होगा। पिछली सरकारों ने 1930 के बाद जातिगत जनगणना बंद कर दी थी। इसके बाद किसी सरकार ने इसे लागू करने की हिम्मत नहीं दिखाई। अब जनगणना होने से पूरे देश के पिछड़े वर्ग को लाभ मिलेगा। इससे इस मुद्दे पर राजनीति करने वालों की बोलती बंद हो जाएगी। अब तक सरकार के पास केवल तीन जातिगत कॉलम थे—आदिवासी, हरिजन और अन्य पिछड़ा वर्ग। इससे पिछड़ा वर्ग को नुकसान उठाना पड़ा। समाज का कहना है कि जो नुकसान अब तक हुआ है, उसकी भरपाई अगले 100 वर्षों में भी नहीं हो पाएगी। सरकार के इस फैसले पर बालोद जिला अध्यक्ष छगन यदु, जिला महासचिव जीवन धनकर, प्रांत अध्यक्ष जगन्नाथ साहू, प्रांत उपाध्यक्ष पुनीत राम सेन, प्रांतीय संरक्षक भोजराम साहू, ब्लॉक अध्यक्ष हिंसाराम साहू, महामंत्री सोमेश साहू, महासचिव डोमन साहू, रामनारायण धनकर, सचिव शिवरंनघाटी और मीडिया प्रभारी तेजराम साहू ने केंद्र सरकार का आभार जताया है।


