अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद का 17वां राष्ट्रीय अधिवेशन शुक्रवार को बालोतरा-नाकोड़ा स्थित लालबाग परिसर में शुरू हुआ। तीन दिवसीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विजय बिश्नोई ने जाति एवं भाषा के आधार पर राष्ट्र की अवधारणा को घातक बताया। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने वकीलों के लिए मेडिकल पॉलिसी लाने और एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट को जल्द पारित कराने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति मुकेश राजपुरोहित, न्यायमूर्ति विवेक ठाकुर, बालोतरा जिला एवं सत्र न्यायाधीश एम.एल. सुथार, जिला कलेक्टर सुशील कुमार यादव, चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल, पचपदरा विधायक अरुण चौधरी, बाड़मेर विधायक प्रियंका चौधरी के अलावा देशभर से बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट व विभिन्न हाईकोर्ट के न्यायाधीशों और भारत सरकार के वरिष्ठ विधि अधिकारियों ने अधिवेशन में हिस्सा लिया। जस्टिस बिश्नोई ने दी सामाजिक समरसता की सीख उद्घाटन सत्र दोपहर 2:30 बजे मां भारती, अधिवक्ता परिषद के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी एवं संविधान निर्माता डॉ. बी आर आंबेडकर के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुआ। “भारतीय संविधान के 75 वर्ष: सामाजिक समरसता” विषय पर आयोजित उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विजय बिश्नोई ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र तब तक सफल नहीं हो सकता, जब तक उसमें लिबर्टी, इक्वालिटी और फ्रैटरनिटी-तीनों एक साथ मौजूद न हों। जस्टिस बिश्नोई ने कहा कि आंबेडकर के विचारों को आत्मसात करते हुए सभी को सामाजिक समरसता के लिए निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने जाति एवं भाषा के आधार पर राष्ट्र की अवधारणा को घातक बताते हुए कहा कि यह विचार कि राजस्थान में केवल राजस्थानी, महाराष्ट्र में केवल मराठी या केरल में केवल मलयाली ही रह सकता है, पूर्णतः गलत है। उन्होंने कहा कि ऐसी कई साझा समस्याएं हैं, जिनके समाधान के लिए अधिवक्ताओं को सजग रहना चाहिए। वकीलों के लिए मेडिकल पॉलिसी और प्रोटेक्शन एक्ट का आश्वासन केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि बालोतरा की धरती भक्ति की भी है और शक्ति की भी। उन्होंने कवि की पंक्तियां “सोने की धरती जठे, चांदी का आसमान, रंग रंगीलो, रसभरियो मारो प्यारो राजस्थान” सुनाते हुए राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख किया। मेघवाल ने बताया कि केंद्र सरकार अब तक 1562 अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त कर चुकी है, जिनकी वर्तमान में कोई आवश्यकता नहीं थी, तथा हाल ही में 71 और अनुपयोगी कानूनों को भी समाप्त किया गया है। उन्होंने वकीलों को आश्वस्त किया कि शीघ्र ही देश में वकीलों के लिए मेडिकल पॉलिसी लाने पर सरकार विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट भी लॉ कमीशन के पास विचाराधीन है, उसे शीघ्र पारित कराने के प्रयास किए जाएंगे। न्यायमूर्ति भाटी ने वकीलों को बताया संविधान का प्रहरी राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने कहा कि भारत विविधताओं का देश है। केवल राजस्थान को ही देखें तो यहां हर 20 किलोमीटर पर पगड़ी और वेशभूषा बदल जाती है। ऐसे में संविधान निर्माताओं के सामने कितनी बड़ी चुनौतियां रही होंगी, इसका अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता के लिए अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद का मंच अत्यंत महत्वपूर्ण है और अधिवक्ताओं को संविधान का प्रहरी एवं सिपाही बताया। सॉलिसिटर जनरल ने कहा- संवैधानिक कर्तव्यों का पालन जरूरी भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अधिवक्ता परिषद का सम्मेलन शहीदी दिवस के दिन आयोजित किया जाना अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता केवल भाषणों से नहीं आएगी, बल्कि इसके लिए धरातल पर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि यदि हम संवैधानिक अधिकारों के अंतर्गत न्यायालयों से राहत चाहते हैं, तो हमें अपने संवैधानिक कर्तव्यों का भी ईमानदारी से पालन करना होगा। अन्य गणमान्य अतिथियों ने भी व्यक्त किए विचार कार्यक्रम में परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता के. श्रीनिवास मूर्ति ने अध्यक्षीय संबोधन दिया। परिषद की गतिविधियों पर महासचिव एवं सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता डी. भरत कुमार ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। जोनल सेक्रेटरी कमल परसवाल, प्रांत सचिव श्याम पालीवाल और स्वागत समिति की ओर से प्रसिद्ध उद्योगपति रमेश मुथा ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में राज्य के महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद, अधिवक्ता परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मीरा ताई, प्रांत अध्यक्ष सुनील जोशी, नागालैंड से आईं अधिवक्ता लवी लोथा एवं प्रांत सचिव पूनम शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता परिषद जोधपुर हाईकोर्ट इकाई के महामंत्री देवकीनंदन व्यास एवं अधिवक्ता प्रतिष्ठा सिंहा ने किया। अंत में प्रांत अध्यक्ष सुनील जोशी ने सभी का आभार व्यक्त किया।


