भास्कर न्यूज | जामताड़ा/मुरलीपहाड़ी जामताड़ा जिले में क्रिसमस का दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे उत्साह और चहल-पहल बढ़ती जा रही है। शहर के प्रमुख बाजारों में क्रिसमस की रौनक साफ नजर आने लगी है। दुकानों में सांता क्लॉज के कपड़े, टोपी, कैंडल, स्टार, क्रिसमस ट्री और गिफ्ट आइटम की बिक्री शुरू हो चुकी है। लोग अपने घरों और चर्च को सजाने के लिए खरीदारी में जुटे हैं। शहर के क्रिश्चन बर्थन चर्च, संत जोसेफ कैथोलिक चर्च मिहिजाम , नारायणपुर का पी एच चर्च, जामताड़ा मिहिजाम रोड के बेवा ग्राम स्थित लेडी ऑफ द वे चर्च के अलावा नारायणपुर में भी चर्च की सजावट का कार्य किया जा रहा है।शहर के मुख्य बाजार ,गांधी मैदान के आसपास और मुख्य चौक-चौराहों पर क्रिसमस से जुड़ी सामग्री की दुकानें सजी हुई हैं। दुकानदारों के अनुसार इस बार सजावट के सामान 100 से लेकर 2500 रुपए तक की रेंज में उपलब्ध हैं। क्रिसमस के मौके पर चरनी सजाने का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। बाजार में प्लेन चरनी के साथ-साथ सजी-सजाई चरनी भी उपलब्ध है। प्लेन चरनी में रखने के लिए बालक यीशु, मरियम, यूसुफ और अन्य प्रतीकात्मक प्रतिमाएं अलग-अलग बिक रही हैं। चरनी सजाने वाले सामान 150 से 1500 रुपए तक की कीमत में मिल रहे हैं। क्रिसमस के साथ ही केक की डिमांड भी बढ़ गई है। जामताड़ा के चर्चों से लेकर घरों तक केक बनाने और मंगाने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। बेकरी में क्रिसमस केक के ऑर्डर आने लगे हैं। लोग रेडीमेड केक के साथ-साथ कस्टमाइज केक भी मंगवा रहे हैं। सांता से लेकर रेनडियर तक हर आइटम की बढ़ी मांग बाजार में सांता क्लॉज के कपड़े बच्चों से लेकर बड़ों तक के साइज में मिल रहे हैं। इसके अलावा बड़े-छोटे डिजाइन में स्टार, क्रिसमस ट्री, रेनडियर, बॉल, गिफ्ट बॉक्स, रंग-बिरंगे रिबन और लाइटिंग आइटम की अच्छी बिक्री हो रही है। दुकानदारों का कहना है कि बच्चों में खासकर डांसिंग और लाइटिंग सांता की मांग ज्यादा है। क्रिसमस को लेकर गिफ्ट आइटम की भी भरमार है। बाजार में लाइटिंग सांता, स्टैंडिंग सांता, पेंसिल सांता, रेनडियर शोपीस, कैंडल सेट, वुडन फ्रेम, बाइबल कोटेशन फ्रेम, बाइबल बैग और की-रिंग जैसे आकर्षक गिफ्ट उपलब्ध हैं। इनकी कीमत 50 से 900 रुपए तक है, जिसे लोग बच्चों और रिश्तेदारों को देने के लिए खरीद रहे हैं। क्रिसमस के मौके पर केक मिक्सिंग सेरेमनी को सौभाग्य और खुशियों का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा 17वीं शताब्दी में यूरोप से शुरू हुई थी, जो अब भारत में भी व्यापक रूप से अपनाई जा रही है। जामताड़ा में भी कई घरों, होटलों और बेकरी में सामूहिक रूप से केक मिक्सिंग सेरेमनी आयोजित की जाती है।


