जामताड़ा में प्रकृति पर्व सोहराय की तैयारी में जुटा आदिवासी समाज

जामताड़ा जिले में सोहराय पर्व की तैयारी जोरों पर है। आदिवासी समुदाय इस विशेष अवसर के लिए अपने घरों की रंगाई-पुताई और सजावट में जुटा है। पांच जनवरी से यह पांच दिनों तक यह त्योहार मनाया जाएगा। वाले इस पारंपरिक पर्व के मद्देनज़र आदिवासी समाज के लोग न केवल घरों की सफाई कर रहे हैं, बल्कि अपने घरों को खास तरीके से सजा रहे हैं। यह पेंटिंग आदिवासी समाज की सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा है, जिसमें प्रकृति, प्रेम और परंपराओं की झलक मिलती है। सोहराय पर्व आदिवासी समुदाय के लिए एक प्रमुख त्योहार है, जो उनके सांस्कृतिक जीवन का प्रतीक है। पेंटिंग में पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, फूल और आदिवासी जीवन की कार्यशैली को दर्शाया जाता है, जो उनके जीवन की गहरी समझ और प्रकृति प्रेम को उजागर करता है। सोहराय पर्व पांच दिनों तक मनाया जाएगा। यह पर्व मुख्य रूप से फसल कटाई के बाद प्रकृति और पशुधन की पूजा -अर्चना के रूप में मनाया जाता है, और इसका उद्देश्य ग्रामीण समाज में खुशहाली और समृद्धि की कामना करना है। सोहराय पर्व की शुरुआत नए चावल से होती है, और इसे पांच दिन तक मनाने की परंपरा है। पहले दिन से लेकर आखिरी दिन तक, ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। लोग इस दौरान पारंपरिक गीतों और नृत्य के माध्यम से अपनी खुशियां व्यक्त करते हैं। महिलाएं विशेष रूप से सज-धज कर घरों में पूजा करती हैं, और पशुधन की पूजा कर उन्हें अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए आशीर्वाद देती हैं। प्रकृति प्रेम और संस्कृति का संदेश आदिवासी समाज के जानकार और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक सुनील बास्की बताते हैं, हम अपनी दीवारों पर केवल रंगाई नहीं करते, बल्कि उन पर उकेरी जाने वाली पेंटिंग के माध्यम से हम अपनी सभ्यता, संस्कृति और प्रकृति प्रेम को प्रदर्शित करते हैं। इस पेंटिंग में हम प्रकृति और मानव प्रेम को चित्रित करते हैं। 5 दिनों तक मनाए जाने वाला यह पर्व मकर संक्रांति के दिन समाप्त होगा। सोहराय पर्व भाई बहन के अटूट प्रेम का पर्व है। सोहराय पर्व आदिवासी समाज के जीवन का अभिन्न हिस्सा है, और इसकी तैयारी में व्यस्त आदिवासी समुदाय अपने पारंपरिक कलाओं और सांस्कृतिक धरोहरों को नए रंगों में बिखेरने की कोशिश कर रहा है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *