डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी अब पढ़ाई का नहीं, टकराव का केंद्र बनती जा रही है। विवि के एमबीए डिपार्टमेंट में प्रस्तावित ‘जायका फूड फेस्टिवल’ ने ऐसा बवाल खड़ा किया कि पिछले चार दिनों से तालाबंदी और धरना-प्रदर्शन जारी है। सोमवार को हालात तब बेकाबू हो गए, जब रजिस्ट्रार कार्यालय में छात्र दो गुटों में बंटकर आमने-सामने आ गए। इस क्रम में टेबल पीटी गई, धमकियां दी गईं और माहौल खुली अराजकता की तरफ बढ़ता दिखा। विवि रजिस्ट्रार डॉ. धनंजय कुमार वासुदेव द्विवेदी के कार्यालय में हालात विस्फोटक हो गए। फूड फेस्ट के समर्थन और विरोध में खड़े छात्रों ने एक-दूसरे को देखते ही आक्रोश जाहिर किया। देख लेंगे, बाहर मिलना… जैसे शब्द सुने गए। यह सिर्फ विरोध नहीं, प्रशासन को खुली चुनौती जैसा दृश्य था। फेस्ट रद्द होने का नोटिस पहले ही जारी हो चुका है छात्रों द्वारा दो दिन की तालाबंदी के बाद डीएसडब्ल्यू डॉ. सर्वोत्तम कुमार ने जायका फूड फेस्टिवल को रद्द करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। डीएसडब्ल्यू का कहना था कि पिछले वर्ष ऐसे आयोजनों से अन्य विभागों की कक्षाएं बाधित हुई थीं। कैंपस को पकौड़ा बाजार नहीं बनने दिया जाएगा। दोनों गुट के छात्रों का यह है तर्क फूड फेस्ट के समर्थन में खड़े छात्रों का कहना है कि यह आयोजन स्किल डेवलपमेंट और प्रैक्टिकल लर्निंग से जुड़ा है। किताबों से बाहर निकल कर रियल वर्ल्ड एक्सपोजर जरूरी है। विरोध कर रहे छात्रों ने कहा कि प्लेसमेंट सेल में अधिकारी का पद 6 महीने से खाली है। न रोजगार मेला, न कैंपस ड्राइव। जायका फेस्ट से छात्रों का भला होने वाला नहीं है। फेस्ट के आयोजन पर आज फैसला लेगा विवि छात्रों के दोनों गुट को उलझते और स्थिति बिगड़ती देख प्रॉक्टर ने कहा कि अभी आप लोग जाइए, इस मुद्दे पर मंगलवार को निर्णय लिया जाएगा। मंगलवार को दो निर्णायक बैठकें होंगी। एक बैठक एमबीए के छात्रों के साथ तथा दूसरी बैठक छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ। इसके बाद ही जायका फूड फेस्ट और पूरे विवाद पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर दिखा प्रॉक्टर डॉ. राजेश कुमार सिंह लगातार दोनों गुट के छात्रों को शांत कराने में जुटे रहे। उन्होंने संयम, संवाद और नियमों की दुहाई दी, पर दोनों गुट नहीं माने। दिखा कि विवि का प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर पड़ चुका है और छात्र समूह सड़कों वाली राजनीति कैंपस में कर रहे हैं।


