जालंधर में शुक्रवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर भड़कीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और हेल्पर्स ने पंजाब के कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत के अर्बन एस्टेट स्थित आवास का घेराव कर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में जिला, ब्लॉक और सेक्टर स्तर के आंगनबाड़ी नेताओं के साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुईं। इस दौरान आंगनवाड़ी वर्करों ने पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि सत्ता में आने से पहले आम आदमी पार्टी ने उनसे जो वादे किए थे, वे आज तक पूरे नहीं हुए हैं।
कार्यकर्ताओं ने साफ शब्दों में कहा कि चुनाव से पहले सरकार ने मानदेय (ऑनररियम) दोगुना करने की गारंटी दी थी, लेकिन दोगुना तो दूर, उन्हें मिलने वाला मौजूदा मानदेय भी कटौती के साथ दिया जा रहा है। इसके साथ ही आंगनवाड़ी नेताओं ने बच्चों के लिए आने वाले राशन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने राशन के टेंडर प्राइवेट कंपनियों को दे दिए हैं, जिसके बाद से सेंटरों में बेहद घटिया और निकम्मा राशन भेजा जा रहा है। वर्करों का आरोप है कि इस टेंडर व्यवस्था में भारी कमीशनखोरी चल रही है, जिसका सीधा असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। आरोप-बच्चों को आंगनबाड़ी सेंटरों से छीनकर प्राइमरी स्कूलों में भेज
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में प्री-प्राइमरी शिक्षा का मुद्दा भी शामिल रहा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय 3 से 6 साल तक के बच्चों को आंगनबाड़ी सेंटरों से छीनकर प्राइमरी स्कूलों में भेज दिया गया था। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इन बच्चों को वापस आंगनवाड़ी सेंटरों में भेजा जाए और आंगनवाड़ी वर्करों को ही फ्री नर्सरी टीचर का दर्जा दिया जाए। प्रदर्शन के दौरान आंगनवाड़ी प्रतिनिधियों के एक गुट ने कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा, जिसके बाद मंत्री द्वारा उचित कार्रवाई के आश्वासन पर घेराव खत्म किया गया।
राशन की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप
आंगबाड़ी वर्कर्स यूनियन की जनरल सेक्रेटरी पंजाब सतवंत कौर ने बच्चों के राशन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि 0 से 6 साल तक के बच्चों के लिए आने वाला राशन प्राइवेट कंपनियों को दे दिया गया है। इसमें भारी कमीशनखोरी हो रही है। गांवों में भेजा जा रहा राशन इतना घटिया है कि लाभार्थी (बेनिफिशियरी) उसे लेने से मना कर रहे हैं और कह रहे हैं कि इस राशन को तो पशु भी नहीं खा सकते। मावां-धीयां सत्कार योजना और भर्ती में धांधली का दावा
यूनियन नेता ने आरोप लगाया कि ‘मां-धी सत्कार योजना’ के तहत सखियों को 300 रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि दिन-रात काम करने वाली वर्कर को महज 25 रुपये और हेल्पर को कुछ भी नहीं दिया जा रहा। यही नहीं, सत्ताधारी पार्टी के नेता वर्करों पर दबाव बनाते हैं कि वे सांझी जगह के बजाय उनके घरों में जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरें। भर्ती और प्रमोशन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सतवंत कौर ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेशों के विपरीत वरिष्ठता (Seniority) को दरकिनार किया जा रहा है। 5 नंबर की शर्त रखकर चहेतों को फायदा पहुंचाने और पैसे ऐंठने का खेल चल रहा है, जिसके कारण कई मामले अदालतों में भी पहुंच चुके हैं। चंडीगढ़ में वाटर कैनन के इस्तेमाल पर रोष
बीते दिनों चंडीगढ़ में हुए प्रदर्शन के दौरान वर्करों पर पानी की बौछारें (वाटर कैनन) छोड़े जाने पर सतवंत कौर ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि अपनी हक की आवाज उठाने वालों को दबाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मानदेय दोगुना नहीं किया गया और आंगनवाड़ी वर्करों को फ्री-नर्सरी टीचर का दर्जा नहीं दिया गया, तो उनका संघर्ष लगातार जारी रहेगा।


