जालंधर में संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य गैर-राजनीतिक किसान संगठनों द्वारा सोमवार को जिला उपायुक्त (डीसी) को राष्ट्रपति के नाम का ज्ञापन सौंपकर तमिलनाडु के वरिष्ठ किसान नेता पी.आर. पंडियन की तत्काल रिहाई की मांग की। किसान नेताओं ने कहा कि पी.आर. पंडियन लंबे समय से किसानों और मजदूरों के हक में संघर्ष कर रहे हैं और सरकार द्वारा उनके खिलाफ की गई कार्रवाई अन्यायपूर्ण है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने बताया कि पी.आर. पंडियन 2013 से उस फैसले के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, जिसमें सरकार ने कृषि भूमि को ‘सेफ जोन’ घोषित करते हुए ऐसे प्रोजेक्ट लागू किए, जिनसे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि इन नीतियों के कारण न केवल किसानों की जमीन और आजीविका प्रभावित हुई, बल्कि पर्यावरण और आम जनजीवन को भी नुकसान पहुंचा। किसान नेताओं का आरोप है कि सरकार कारपोरेट हितों को बढ़ावा देते हुए आम लोगों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है और जनहित में संघर्ष करने वाले नेताओं पर अन्यायपूर्ण कार्रवाई कर रही है। किसान नेताओं को सजा देने के बजाय सम्मान किया जाना चाहिए किसान मोर्चा ने मांग की कि पी.आर. पंडियन को सभी मामलों में राहत देते हुए जेल से रिहा किया जाए, ताकि वे आगे भी किसानों और मजदूरों की आवाज उठा सकें। नेताओं ने कहा कि ऐसे संघर्षशील नेताओं को सजा देने के बजाय उनका सम्मान किया जाना चाहिए, जिससे भविष्य में जनहित की लड़ाइयों को और मजबूती मिले। बता दें कि पी.आर. पंडियन के समर्थन में संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य गैर-राजनीतिक किसान संगठनों द्वारा देशभर के जिला मुख्यालयों में ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। इसी क्रम में जालंधर में भी यह ज्ञापन देकर आंदोलन को आगे बढ़ाया गया।


